By अभिनय आकाश | Apr 27, 2026
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक लिव-इन रिलेशनशिप में रेप और मारपीट के आरोपों से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए कुछ अहम टिप्पणियां कीं। इस मामले की सुनवाई जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने की। यह मामला एक महिला ने उठाया था, जिसने दावा किया था कि शादी का वादा करने के बाद एक पुरुष ने उसके साथ मारपीट की थी।
कोर्ट ने बताया कि शादी के बाहर के रिश्तों में कुछ जोखिम हो सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि जब ऐसे रिश्ते खत्म होते हैं, तो हालात अक्सर पेचीदा हो जाते हैं। जज ने कहा कि लिव-इन रिश्तों में यही होता है। वे सालों तक साथ रहते हैं। जब वे अलग होते हैं, तो महिला शिकायत दर्ज कराती है... ये सब शादी के बाहर के रिश्तों की ही पेचीदगियां हैं। सुनवाई के दौरान, महिला के वकील ने कहा कि उसे पता नहीं था कि वह आदमी पहले से शादीशुदा है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि वह सिर्फ़ मौजूदा मामले के तथ्यों पर ही ध्यान देगा। बेंच ने महिला की हालत पर भी चिंता जताई और कहा कि वह अपने बच्चे के लिए मदद मांग सकती है। कोर्ट ने साफ़ किया कि भले ही रिश्ते को कानूनी मान्यता न मिली हो, लेकिन बच्चे के अधिकार फिर भी अहम बने रहते हैं।