By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 22, 2026
उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 2017 के उस आदेश को शनिवार को रद्द कर दिया, जिसमें 2016 में आयोजित विश्व संस्कृति महोत्सव के कारण यमुना के बाढ़ क्षेत्र को हुए नुकसान के लिए श्री श्री रविशंकर के ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ को जिम्मेदार ठहराया गया था। शीर्ष अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को फाउंडेशन द्वारा जमा किए गए पांच करोड़ रुपये के पर्यावरणीय मुआवजे को वापस करने का निर्देश भी दिया। न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति एन. के. सिंह की पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जिससे पता चलता है कि आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को सौंपे जाने से पहले ही कार्यक्रम स्थल खराब स्थिति में था।
एक समिति की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को पांच करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया था और कहा था कि कार्यक्रम से बाढ़ क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अधिकरण विशेषज्ञ समिति की उस रिपोर्ट से प्रभावित हो गया, जिसमें कहा गया था कि स्थल पर बड़े पैमाने पर तैयारियां चल रही थीं और इस आधार पर उसने निष्कर्ष निकाला कि ऐसे काम करके अपीलकर्ता ने बाढ़ क्षेत्र को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया। अदालत ने सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने के लिए डीडीए की भी आलोचना की और उसे एनजीटी के निर्देश के अनुसार यमुना के बाढ़ क्षेत्र के बहाली का काम जारी रखने का निर्देश दिया।
विश्व सांस्कृतिक महोत्सव 11 से 13 मार्च, 2016 तक आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम दिल्ली में यमुना नदी के सक्रिय बाढ़ क्षेत्र में डीएनडी फ्लाईवे के आगे की ओर 25 हेक्टेयर क्षेत्र में आयोजित किया गया था।