तमिलनाडु के राज्यपाल को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, बिना संवाद किए बिल पर नहीं बैठ सकते

By अभिनय आकाश | Feb 08, 2025

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर राज्यपाल राज्य सरकार को कोई सूचना दिए बिना विधान सभा द्वारा पारित विधेयकों पर अपनी सहमति रोक देते हैं तो एक गतिरोध पैदा हो सकता है और आश्चर्य हो सकता है कि गतिरोध कैसे हल किया जाएगा। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि अपनी राय बताए बिना केंद्रीय कानून के प्रति नापसंदगी की धारणा के आधार पर विधेयकों पर यूं ही नहीं बैठे रह सकते। जब राज्यपाल को लगता है कि विधेयक नापसंद है, यह परिवर्तन, संशोधन आदि के दायरे में नहीं आएगा, तो हमारे पास एक प्रश्न है। यदि राज्यपाल का प्रथम दृष्टया यह मानना ​​है कि विधेयक नापसंद है, तो क्या उन्हें इसे राज्य सरकार के ध्यान में नहीं लाना चाहिए? सरकार से यह कैसे उम्मीद की जाती है कि वह जान ले कि राज्यपाल के मन में क्या है? 

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वेंकटरमानी ने कहा कि सात विधेयकों पर राष्ट्रपति ने सहमति रोक दी थी और राज्य सरकार को फैसले के बारे में सूचित कर दिया गया था। सहमति को रोकने का मतलब सहमति को अस्वीकार करना है। एजी ने प्रस्तुत किया, जब राष्ट्रपति ने सहमति को रोकने का फैसला किया।

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