By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 05, 2026
नयी दिल्ली, पांच अगस्त (भााषा) उच्चतम न्यायालय ने उस याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए बुधवार को कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को छह हफ़्ते का समय दिया जिसमें उपभोक्ताओं को उत्पादों के वितरकों और विक्रेताओं की जानकारी के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता, शुद्धता एवं प्रमाणन की जानकारी का ‘‘अधिकार’’ दिये जाने का अनुरोध किया गया है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कहा गया था कि ग्राहकों के लिए सही जानकारी के आधार पर फ़ैसले लेने और अनुचित या प्रतिबंधात्मक व्यापारिक तौर-तरीकों और अनैतिक शोषण से खुद को बचाने के लिए ‘‘जानने का अधिकार’’ बहुत जरूरी है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल जुलाई में इस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी और केंद्र, विभिन्न राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य से जवाब तलब किया था।
याचिका में कहा गया है कि अगर किसी ग्राहक को किसी उत्पाद या सेवा से कोई समस्या होती है, तो शिकायत दर्ज करने और उपभोक्ता निवारण मंच के जरिये समाधान पाने के लिए वितरक, डीलर और विक्रेता की जानकारी होना ज़रूरी है। इसमें मुख्य रूप से यह कहा गया है कि ‘‘जानने का अधिकार’’ ग्राहकों को जानकारी पाने या सुरक्षित रहने और खरीद-बिक्री एवं पैसों के लेन-देन के दौरान सही फ़ैसले लेने में सक्षम बनाता है।