धीमी सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट की महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी, कहा- जनता के बीच बेनकाब कर देंगे

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 11, 2026

उच्चतम न्यायालय ने आपराधिक मुकदमों की सुनवाई में तेजी न लाने और सिर्फ जमानत याचिकाओं का विरोध करने को लेकर महाराष्ट्र सरकार के प्रति बेहद कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि वह इस ढुलमुल रवैये के लिए सरकार को जनता के बीच बेनकाब कर देगा।

सुनवाई के दौरान अपहरण और हत्या के मामले में गिरफ्तार आरोपी ने न्यायालय को बताया कि वह पिछले चार साल से जेल में बंद है। इस दौरान निचली अदालत में उसका मामला 86 बार सूची में आया, लेकिन उसे 53 बार अदालत में पेश ही नहीं किया गया। उच्चतम न्यायालय ने आरोपी को निचली अदालत में समय पर पेश न करने को महाराष्ट्र सरकार की एक गंभीर चूक करार दिया है।

आरोपी के शीघ्र सुनवाई के मौलिक अधिकार का उल्लेख करते हुए पीठ ने इस पर गहरी चिंता जताई। पीठ ने कहा कि चार साल के लंबे समय में 34 गवाहों में से केवल दो गवाहों से ही पूछताछ हो सकी है, जो बेहद परेशान करने वाली बात है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब राज्य सरकार जमानत का पुरजोर विरोध करती है, तो मुकदमों को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी भी उसी की होती है, जिसमें वह पूरी तरह विफल रही है।

महाराष्ट्र सरकार के वकील ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि अब सभी आरोपियों को सुनवाई की हर तारीख पर अदालत में पेश किया जा रहा है। इस पर न्यायालय ने राज्यों को सुनवाई प्रक्रिया को तेज करने के लिए एक विशेष नीति बनाने का निर्देश दिया। पीठ ने आदेश दिया कि हर हफ्ते कम से कम चार गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं और इसका रिकॉर्ड सुनवाई करने वाली अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। न्यायालय ने सचेत किया कि यदि भविष्य में ऐसे मामले दोबारा आए, तो और भी सख्त निर्देश जारी किए जाएंगे।

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