Israel ने भारत पर किया तगड़ा ऐलान, ट्रंप भी हैरान!

By अभिनय आकाश | Jul 11, 2026

इजराइल और भारत की दोस्ती के चर्चे पूरी दुनिया में होते हैं। भारत और इजराइल लगभग हर मुद्दे पर एक दूसरे का सहयोग करते हैं। आपने देखा होगा कि जब हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दावा किया कि अमेरिका ही इजराइल का एकमात्र ताकतवर सहयोगी है तो नेतन्याहू भड़क गए थे और ट्रंप को बता दिया था कि भारत जैसा देश ही उनका सबसे मजबूत मित्र है। इसी बीच अब इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू  ने भारत को लेकर तगड़ा ऐलान किया है। नेतन्याहू ने अपने बयान में साफ संकेत दिया है कि इजराइल अब सिर्फ अमेरिका पर निर्भर रहने के बजाय भारत जैसे बड़े और प्रभावशाली देशों के साथ रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। यही नहीं बल्कि उन्होंने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि हमें नए गठबंधन बनाने होंगे और नए रिश्ते विकसित करने होंगे। यही काम मैं इस समय भारत के साथ कर रहा हूं।

दरअसल नेतन्याहू का यह बयान केवल भारत की तारी भर नहीं है बल्कि इससे बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत भी माना जा रहा है जो दिखाता है कि इजराइल भारत को लेकर किस तरह की उम्मीदें रखता है। उनका यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब अमेरिका, ईरान समझौते को लेकर वाशिंगटन और तेल अवेब के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। नेतन्याहू ने भारत का जिक्र करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि इजराइल के पास अमेरिका के अलावा भी मजबूत साझेदार मौजूद हैं। भारत और इजराइल के बीच डिफेंस, एग्रीकल्चर और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में पहले से गैर संबंध रहे हैं और अब यह साझेदारी रणनीतिक स्तर पर और मजबूत होती हुई दिखाई दे रही है। 

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अमेरिका और इजराइल के रिश्तों में दरार क्यों आई है 

दरअसल ईरान के साथ लंबे तनाव के दौरान इजराइल चाहता था कि अमेरिका उसके साथ मिलकर ईरान पर ज्यादा दबाव बनाए रखे। लेकिन अमेरिका ने संघर्ष को आगे बढ़ाने के बजाय ईरान के साथ शांति समझौते का रास्ता चुना। इस फैसले से इजराइल के कई नेता असहमत दिखाई दिए और उन्होंने सादिक रूप से इसकी आलोचना भी की। इसी मुद्दे पर दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच भी मतभेद बढ़े। इजराइल ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया शांति समझौते और लेबनन से जुड़े युद्ध विराम प्रस्तावों को मानने से इंकार कर दिया है। इजराइली नेतृत्व ने साफ किया था कि वे अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से समझौता नहीं करेंगे। अब इजराइल का अमेरिका पर उस तरह का भरोसा नहीं रहा जैसा कि उस पर कुछ समय पहले था।

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