सुषमा स्वराज: प्रखर और ओजस्वी वक्ता, प्रभावी पार्लियामेंटेरियन और कुशल प्रशासक जिन्हें हर वर्ग के लोगों का मिला भरपूर प्यार

By अभिनय आकाश | Feb 14, 2022

एक महान वक्त, एक संपूर्ण इंसान, एक सक्षम राजनेता और एक अत्यंत प्रभावी व्यक्तित्व की धनी सुषमा स्वराज ने मानवता की सेवा में जीवन को अर्पित कर दिया। चेहरे पर तेज, वाणी में ओज, जीवा पर सरस्वती उनके व्यक्तित्व को अनोखा बनाता था। भारतीय राजनीति की स्तंभ रही पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने कुशल नेतृत्व से इस देश के लोगों के जीवन में बदलाव लाने की ओहल की। सिर्फ 25 साल की उम्र में जब वो विधायक चुन कर आयीं तो उन्होंने पलटकर नहीं देखा। उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिली  उसे सुषमा स्वराज ने जी जान से निभाया। सुषमा स्वराज इतनी मृदुभाषी और मिलनसार थीं कि हर कार्यकर्ता को उन्होंने अपना परिवार समझा। तभी तो न सिर्फ बीजेपी बल्कि विपक्षी दलों में भी सुषमा स्वराज खासी लोकप्रिय थीं। लोग उनका बेहद आदर करते थे। जीवनभर राष्ट्र और समाज की सेवा करने वालीं सुषमा स्वराज ने अपने निधन से कुछ समय पहले ही सरकार के कश्मीर पर लिए गए फैसले पर बेहद खुशी जताई थी। आने वाली पीढ़ियां उनके व्यक्तित्व और अद्भुत भाषाशैली को कभी नहीं भूल पाएगी।

सुषमा स्वराज का जन्म हरियाणा के अंबाला कैंट में 14 फरवरी 1952 को हुआ। सुषमा ने कानून की पढ़ाई करने के बाद सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू कर दी। उन्होंने अपने राजीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की। 1970 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ीं। जुलाई 1975 में स्वराज कौशल से विवाह हुआ। स्वराज कौशल सुप्रीम कोर्ट में सहकर्मी थे। आपातकाल के दौरान जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन में हिस्सा लिया। इसी दौरान इंदिरा गांधी के घोरतम शत्रुओं का मुकदमा लड़ने और उनका खुलकर साथ देने के लिए सुषमा स्वराज तैयार हो गईं थीं। जार्ज के समर्थन में सुषमा सभा में नारा लगाती थीं, जेल का फाटक टूटेगा, जार्ज हमारा छूटेगा। 

25 साल की उम्र में श्रम मंत्री बनीं

सुषमा ने हरियाणा से राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी और 1977 में पहली बार हरियाणा विधानसभा का चुनाव जीता। 25 साल की उम्र में चौधरी देवी लाल सरकार में में वे राज्य की श्रम मंत्री बनीं। वे हरियाण सरकार की सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री थीं। सुषमा स्वराज देश की राजधानी दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। दिसंबर 1998 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही थीं। वे दिल्ली की पांचवीं मुख्यमंत्री थीं। 1996 में दक्षिण दिल्ली से पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं और अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिनों की सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री बनीं।

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हर समुदाय, हर वर्ग के लोगों का भरपूर प्यार 

भारतीय राजनीति में सुषमा स्वराज ऐसी शख्सियत थीं जिन्हें हर पार्टी, हर समुदाय, हर वर्ग के लोगों का भरपूर प्यार मिला। तेज तर्रार और प्रखर नेता की छवि रखने वाली सुषमा स्वराज उन दिग्गज नेताओं में से एक थी जिन्होंने अपने ओज और तेज से समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया। उनकी राजनीतिक कौशल और भाषा शैली ऐसी थी कि हर कोई उनका मुरीद था। चार दशक के राजनीतिक कॅरियर में तीन बार विधायक और सात बार सांसद रहीं। 15वीं लोकसभा में नेताप्रतिपक्ष रहीं। संसदीय कार्य मंत्री, केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और विदेश मंत्रालय का जिम्मा संभाला। नवंबर 2016 में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। नवंबर 2018 में ऐलान किया कि 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी। जिसके बाद 6 अगस्त 2019 को सुषमा स्वराज का कार्डिक अरेस्ट से निधन हो गया।

- अभिनय आकाश

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