Swami Vivekananda Death Anniversary: स्वामी विवेकानंद ने पश्चिमी देशों तक पहुंचाए थे योग और वेदांत के दर्शन

By अनन्या मिश्रा | Jul 04, 2025

स्वामी विवेकानंद एक महान भारतीय संत, आध्यात्मिक गुरु और समाज सुधारक थे। स्वामी विवेकानंद का असली नाम नरेंद्र नाथ दत्त था। आज ही के दिन यानी की 04 जुलाई को स्वामी विवेकानंद की मृत्यु हो गई थी। उन्होंने अपने जीवन में जो उपलब्धियां अर्जित की थीं, वह देशवासियों के लिए सम्मान योग्य बन गई थीं। उनका जीवन हर युवा के लिए प्रेरणास्त्रोत है। स्वामी विवेकानंद के जीवन और शिक्षाओं ने सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में आध्यात्मिक जागरण और मानव की सेवा की प्रेरणा दी थी। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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रामकृष्ण परमहंस से मिलन

नरेन्द्रनाथ की आध्यात्मिक खोज ही उनको रामकृष्ण परमहंस के पास लेकर आई। रामकृष्ण परमहंस के साथ नरेन्द्रनाथ की पहली मुलाकात साल 1881 में हुई थी। परमहंस ने उनको अपने शिष्य के रूप में स्वीकार किया और आत्मज्ञान का मार्ग दिखाया।

संन्यास और नया नाम

1886 में रामकृष्ण परमहंस के निधन के बाद, नरेन्द्रनाथ ने संन्यास ले लिया। संन्यासी नरेंद्रनाथ ने अपना नाम बदलकर स्वामी विवेकानंद रख लिया। इसके बाद उन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्रा की और भारतीय समाज की दशा को देखा और समझा।

शिकागो धर्म महासभा

साल 1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म महासभा में स्वामी विवेकानंद ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। यहां पर उनके भाषण में पश्चिमी देशों में भारतीय संस्कृति और वेदांत दर्शन की महत्ता को उजागर किया। स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण की शुरूआत 'अमेरिका के भाइयों और बहनों' के संबोधन से हुई और इसने सबका दिल जीत लिया। उनके भाषण से दो मिनट तक धर्म संसद तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।

रामकृष्ण मिशन की स्थापना

साल 1897 में स्वामी विवेकानंद ने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस को समर्पित रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। इसका उद्देश्य शिक्षा, सेवा और आध्यात्मिकता के जरिए से समाज की सेवा करना था। इस मिशन द्वारा कई विद्यालय, अस्पताल औऱ सामाजिक सेवा के कार्य शुरू हुई। इसके अलावा स्वामी विवेकानंद ने बारानगोर मठ की स्थापना की, जोकि बाद में रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय बना। इस मठ का उद्देश्य धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक कार्यों को समर्थन देना है। 

निधन

स्वामी विवेकानंद का 04 जुलाई 1902 को बेलूर मठ में निधन हो गया था, उस दौरान वह सिर्फ 39 साल के थे। लेकिन स्वामी विवेकानंद के जीवन और कार्यों का प्रभाव आज भी व्यापक रूप से महसूस किया जा सकता है।

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