By अनन्या मिश्रा | Jan 12, 2026
भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली और आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद का 12 जनवरी को जन्म हुआ था। स्वामी विवेकानंद ने सिर्फ भारतीय आध्यात्म का पूरी दुनिया में डंका बजाया, बल्कि सोए हुए भारतीय समाज को जगाने का काम भी किया था। वह वेद, शास्त्र और भारतीय संस्कृति के प्रति बचपन से ही गहरी रुचि रखते थे। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
युवा नरेंद्रनाथ के मन में ईश्वर को लेकर काफी जिज्ञासा थी। ऐसे में उन्होंने कई विद्वानों से पूछा कि क्या आपने ईश्वर को देखा है। लेकिन किसी ने भी उनको सटीक जवाब नहीं दिया। हालांकि रामकृष्ण परमहंस ने नरेंद्रनाथ से निडर होकर कहा, 'हां मैंने ईश्वर देखा है, ठीक वैसे ही जैसे मैं तुम्हें देख रहा हूं।' इस प्रश्न का उत्तर पाने के बाद नरेंद्रनाथ उनके शिष्य बन गए।
स्वामी विवेकानंद को अंतरराष्ट्रीय पहचान तब मिली, जब उन्होंने शिकागो की विश्व धर्म संसद में भाषण दिया था। स्वामी विवेकानंद के भाषण की शुरूआत, 'मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों' से की थी। इस संबोधन को सुनकर पूरा हॉल 2 मिनट तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। स्वामी विवेकानंद ने बताया कि हिंदुत्व सभी धर्मों को समाहित करने की शक्ति रखता है।
स्वामी विवेकानंद की एकाग्रता इतनी तेज थी कि वह किसी किताब को एक बार पढ़ लेते थे, तो उनको उस किताब के हर पन्ने का हर शब्द याद हो जाता था। बताया जाता है कि वह लाइब्रेरी से मोटी-मोटी किताबें लाते थे और फिर अगले दिन ही किताबें वापस कर देते थे। जब एक बार लाइब्रेरियन ने उनसे पूछा कि क्या आप सच में इन किताबों को पढ़ते हैं, तो उन्होंने किताब का कोई किस्सा सुनाकर लाइब्रेरियन को हैरान कर दिया था।
वहीं 1902 में 39 साल की उम्र में स्वामी विवेकानंद का निधन हो गया था।