Sydney Bondi Beach पर आतंकी हमला: हनुक्का कार्यक्रम में फायरिंग, 11 की मौत

By Ankit Jaiswal | Dec 14, 2025

रविवार की शाम सिडनी का मशहूर बॉन्डी बीच अचानक गोलियों की आवाज़ से दहल उठा। बता दें कि यहां यहूदी समुदाय के हनुक्का पर्व की शुरुआत के अवसर पर आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दो हथियारबंद हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस हमले में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 29 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

पुलिस कार्रवाई के दौरान एक संदिग्ध हमलावर को मौके पर ही ढेर कर दिया गया, जबकि दूसरे को गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया गया है, जिसकी हालत गंभीर बनी हुई है। घटना के तुरंत बाद बड़े पैमाने पर आपातकालीन राहत अभियान शुरू किया गया और घायलों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार मृतकों की संख्या अभी “स्थिर नहीं” है क्योंकि कई घायल गंभीर अवस्था में इलाज करा रहे हैं।

न्यू साउथ वेल्स के प्रीमियर क्रिस मिंस ने कहा कि यह हमला सिडनी के यहूदी समुदाय को निशाना बनाकर किया गया प्रतीत होता है। उन्होंने इसे बेहद दर्दनाक और चिंताजनक घटना बताया। वहीं प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने भी घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि बॉन्डी बीच से सामने आई तस्वीरें बेहद झकझोर देने वाली हैं और राहतकर्मी लगातार जान बचाने में जुटे हुए हैं।

घटनास्थल से सामने आए वीडियो में एक आम नागरिक को एक हमलावर को काबू में कर उसका हथियार छीनते हुए देखा गया है। सोशल मीडिया पर वायरल अन्य फुटेज में लोग चीखते-चिल्लाते हुए भागते, पुलिस द्वारा घायलों को सीपीआर देते और इलाके को खाली कराते नजर आ रहे हैं। चश्मदीदों ने बताया कि फायरिंग कई मिनट तक रुक-रुक कर होती रही और लोग अपना सामान छोड़कर जान बचाने के लिए भागने लगे।

पुलिस ने बताया कि इलाके में कुछ संदिग्ध वस्तुएं भी मिली हैं, जिनकी जांच बम निरोधक दस्ते द्वारा की जा रही है। एक संदिग्ध के वाहन से इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस मिलने की भी पुष्टि हुई है, जिसके बाद आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया गया है।

गौरतलब है कि बॉन्डी बीच ऑस्ट्रेलिया के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है, जहां सप्ताहांत पर भारी भीड़ रहती है। ऑस्ट्रेलिया में सामूहिक गोलीबारी की घटनाएं बेहद दुर्लभ मानी जाती हैं। 1996 के पोर्ट आर्थर नरसंहार के बाद देश में सख्त बंदूक कानून लागू किए गए थे, जिसके चलते इस तरह की घटनाएं बहुत कम देखने को मिलती हैं। इस हमले ने न केवल स्थानीय समुदाय बल्कि पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया है और धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।

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