Matrubhoomi: बिजनेस के लिए नहीं बल्कि अपमान का बदला लेने के लिए जमशेदजी टाटा ने बनवाया था 'होटल ताज'

By रेनू तिवारी | May 19, 2022

जिन लोगों ने ताज होटल के आतिथ्य का अनुभव किया है वह जानते हैं कि इस तरह से अपने गेस्ट का स्वागत और सत्कार कोई दूसरा होटल नहीं कर सकता है। पूरी दुनिया में ताज की हॉस्पिटेलिटी को कोई चुनौती नहीं दे सकता है। भारत के मुंबई से शुरू हुई ताज होटलों की सीरीज पूरे विश्व में फैली हुई है। ताज विश्वभर में होटस्ल के मशहूर ब्रांडों में सबसे शीर्ष पर है। ताज होटल्स इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड की एक सहायक कंपनी है। इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) होटल्स का व्यवसाय करने वालों के एक समूह को एक साथ लाती हैं। जो पूरे विश्व में लग्जरी सुविधाओं के साथ होटल में आये मेहमानों को भारतीय आतिथ्य का अनुभव देती है क्योंकि भारत ही एक ऐसा देश है जहां अतिथि को भगवान माना जाता है और उसका सत्कार भगवान जैसे ही किया जाता है। 

ताज की सुविधाओं के बारे में तो सभा जानते हैं लेकिन हम में से ज्यादातर लोग भारत के प्रतिष्ठित होटल की नींव के पीछे का असली कारण शायद नहीं जानते हैं। आखिर विश्वभर में होटल इंडस्ट्री में  सबसे मशहूर ताज होटल को बनाने के पूरे आखिर क्या कारण था और इस कितने पैसों में बनाया गया था, आखिर ताज होटन बनने के पीछे की पूरी कहानी क्या हैं? आज हम आपको बताएंगे कि ताज को बनाने के पीछे कोई होटल का बिजनेस करने की मंशा नहीं था बल्कि ये एक बदला था जिसे जमशेदजी टाटा ने अंग्रेजों से लिया था!

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जमशेदजी टाटा की बदले की कहानी

ऐसा कहा जाता है कि जमशेदजी टाटा के दिल दिमाग में ताज बनाने की कोई इच्छा नहीं थी लेकिन एक दिन वह अपने दोस्त से मिलने के लिए लंदन के एक लग्जरी होटल में मिलने के लिए गये तब उन्हें उस होटल में घुसने नहीं दिया गया। उन्हें यह कहते हुए बाहर निकाल दिया गया कि वो हिंदुस्तानी हैं और भारतीयों कि इस होटल में एंट्री बैन हैं। यह बात जमशेदजी टाटा को बहुत चुभ गयी थी। जमशेदजी टाटा को यह अपने अपमान के साथ साथ यह भारत का भी अपमान लगा। उसी दौरान उन्होंने अपने मन में ठान लिया था कि वह भारत में एक ऐसा होटल बनाएंगे जो पूरी दुनिया में सबसे बड़ा ब्रांड बनेगा। इस तरह भारत का पहला सुपर-लक्जरी होटल अस्तित्व में आया। अब ताज पूरी दुनिया में आकर्षण का केंद्र है।

प्रतिष्ठित ताज होटल की नींव

'डायमंड बाय द सी' ताजमहल पैलेस मुंबई में एक वास्तुशिल्प गहना है। ताज की नींव टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा ने 1898 में रखी थी। 31 मार्च 1911 को गेटवे ऑफ इंडिया की नींव रखे जाने से पहले ही होटल ने 16 दिसंबर, 1902 को पहली बार मेहमानों के लिए अपने दरवाजे खोले थे। होटल को बनवाने में 25 लाख रूपये लगे थे। ताजमहल पैलेस बिजली से जगमगाने वाली बॉम्बे की पहली इमारत थी। होटल दो अलग-अलग इमारतों से बना है: ताज महल पैलेस और टॉवर, जो ऐतिहासिक और स्थापत्य रूप से एक दूसरे से अलग हैं। ताज महल पैलेस बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में बनाया गया था, जबकि टॉवर 1973 में खोला गया था।

ताज होटल का इतिहास

होटल का एक लंबा और प्रतिष्ठित इतिहास है, जिसमें कई उल्लेखनीय अतिथि शामिल हैं, राष्ट्रपति से लेकर, क्रिकेट के कप्तानों और बिजनेस के सितारों तक कई बड़ी हस्तियां इस होटल में रुक चुकी हैं। रतनबाई पेटिट, पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की दूसरी पत्नी 1929 में अपने अंतिम दिनों के दौरान होटल में रहती थीं। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, होटल को 600 बिस्तरों के साथ एक सैन्य अस्पताल में बदल दिया गया था। इसे ब्रिटिश राज के समय से ही बेहतरीन होटलों में से एक माना जाता है। यह होटल 2008 के मुंबई हमलों में लक्षित मुख्य स्थलों में से एक था।

विश्व के सबसे मजबूत होटल ब्रांड के रूप में पहचाना गया

2008 के मुंबई हमले के बाद कई उतार-चढ़ावों के बावजूद, ताज लक्जरी होटल श्रृंखला ने विशेष रूप से भारत के अपने घरेलू बाजार में विचार, परिचित, सिफारिश और प्रतिष्ठा के लिए ब्रांड फाइनेंस के 'ग्लोबल ब्रांड इक्विटी मॉनिटर' पर बहुत अच्छा स्कोर किया।

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