Laxmi Puja: लक्ष्मी पूजन में इन बातों का रखें विशेष ख्याल, ऐसे करेंगे पूजा तो साल भर सौभाग्य देगा साथ

By अनन्या मिश्रा | Nov 12, 2023

हर साल कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को दिवाली का पर्व मनाया जाता है। बता दें कि देश में धूमधाम से दिवाली का पर्व मनाया जाता है। इस साल आज यानी की 12 नवंबर 2023 को दिवाली का त्योहार मनाया जा रहा है। इस दिन हर कोई अपने-अपने घरों को दीपकों और रोशनी से सजाते हैं।

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लक्ष्मी पूजा की खास बातें

मान्यता के अनुसार, मां लक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है। कहते हैं जिस पर मां लक्ष्मी की कृपा होती है, उसे धन-धान्य की कमी नहीं होती है। मां लक्ष्मी को धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी कहा जाता है। 

जब देवताओं और दानवों ने मिलकर क्षीर सागर में समुद्र मंथन किया, तो समुद्र से 14 रत्नों की प्राप्ति हुई। समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई। जिसके बाद श्रीहरि विष्णु ने माता लक्ष्मी को अपनी अर्धांग्नी के रूप में धारण किया। 

मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन से जिस दिन मां लक्ष्मी निकली थी, उस दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या थी। जिसके बाद से यह दिन दिवाली के तौर पर मनाया जाता है।

मां लक्ष्मी का वाहन उल्लू है। कहा जाता है कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी अपनी सवारी उल्लू पर बैठकर धरती लोक का भ्रमण करती हैं। इसके अलावा महालक्ष्मी का वाहन हाथी को भी माना गया है। 

भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ मां लक्ष्मी क्षीर सागर में कमल के पुष्प पर वास करती हैं। साथ ही मां लक्ष्मी को कौरी अत्यंत प्रिय हैं।

जब देवी लक्ष्मी समुद्र मंथन के दौरान समुद्र से निकली, तो उनके हाथ में स्वर्ण से भरा कलश भी था। इस कलश से मां लक्ष्मी धन की वर्षा करती रहती हैं। 

मां लक्ष्मी के मंत्र श्री कमले कमलाये प्रसीद प्रसीद महालक्ष्मये नम: का जाप करने से व्यक्ति को मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

मां लक्ष्मी का प्रिय भोग सिंघाड़ा, बताशा, खीर, हलुआ, मखाना, पान, अनार, सफेद व पीले रंग के मिष्ठान और केसर आदि है।

मां लक्ष्मी के 8 स्वरुपों को अष्टलक्ष्मी कहा गया है। मां लक्ष्मी के 8 स्वरुप जिनमें- आदिलक्ष्मी, धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, गजलक्ष्मी, वीरलक्ष्मी, विजयलक्ष्मी और विद्यालक्ष्मी हैं। 

मान्यता के अनुसार, जिन घरों में केला और तुलसी का पौधा हो, तो रोज उसके नीचे दीपक जलाना चाहिए। ऐसा करने से घर में मां लक्ष्मी का वास होता है। जहां केले का पेड़ भगवान श्रीहरि विष्णु को प्रिय है, तो वहीं तुलसी के पौधे को मां लक्ष्मी का रुप माना गया है। 

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