By अनन्या मिश्रा | May 09, 2026
गजलों के शहंशाह कहे जाने वाले तलत महमूद का 09 मई को निधन हो गया था। भावुक कर देने वाली अपनी थरथराती, कांपती और मखमली आवाज से उन्होंने सबका दिल जीत लिया था। वह अपने दौर के बेहद सम्मानित सिंगर रहे हैं। दिलों को छू लेने वाली गायकी की दम पर तलत महमूद ने अपने समकालीन सिंगरों मोहम्मद रफी, मुकेश, मन्ना डे, किशोर कुमार और हेमंत कुमार के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर सिंगर तलत महमूद के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
इसके बाद एच.एम.वी द्वारा उनकी गज़लों का एक रिकॉर्ड जारी होने के बाद संगीतकारों का ध्यान उनकी ओर गया। यह रिकॉर्ड उन्होंने तपन कुमार के नाम से गाया था। लेकिन फिल्मों में तलत को पहला ब्रेक 'शिकस्त' के गीत 'सपनों की सुहानी दुनिया को' से मिला था। लेकिन तलत महमूद को साल 1944 में गाए उनके गीत 'तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी मन' से मिली थी।
इस कामयाबी के बाद तलत ने अभिनय की दुनिया में किस्मत आजमाने का मौका मिला। वह खूबसूरत थे और उन्होंने कई फिल्मों में अभिनय किया। इस दौरान उन्होंने माला सिन्हा, नूतन और सुरैया जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों के साथ काम किया। जब उनको अभिनय में बड़ी कामयाबी नहीं मिली, तो उन्होंने अपना पूरा ध्यान संगीत पर केंद्रित कर दिया था।
बता दें कि तलत महमूद पहले ऐसे इंडियन सिंगर थे, जो व्यावसायिक कंसर्ट के लिए देश से बाहर विदेश गए थे। इसके बाद दुनिया भर में तमाम सिंगर्स ने कंसर्ट करने शुरूकर दिए थे। तलत महमूद ने 'मेरी याद में तुम न आंसू बहाना', 'जायें तो जायें कहां', 'जलते हैं जिसके लिए', 'फिर वही शाम वही गम' और 'ऐ मेरे दिल कहीं और चल' आदि गाने गाए हैं। भारत सरकार द्वारा उनको साल 1992 में 'पद्मभूषण' से सम्मानित किया गया था।
वहीं 09 मई 1998 में तलत महमूद ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था।