भारत छोड़िए तालिबान ने पाकिस्तान से उगलवाया सच, Afghanistan पर ड्रोन अटैक के पीछे ट्रंप का हाथ

By अभिनय आकाश | Oct 31, 2025

दुश्मन को हराना आसान है लेकिन उससे उसकी गलती उगलवाना मुश्किल है और आज पाकिस्तान के साथ ठीक वही हुआ। भारत अगर चाहे तो पाकिस्तान को एक झटके में नक्शे से मिटा सकता है। लेकिन भारत कभी यह नहीं कर पाया

इतिहास में पहली बार पाकिस्तान ने लिखित में मान लिया कि उसने एक विदेशी देश को अपनी जमीन दूसरे देशों पर हमला करने के लिए दे रखी थी। यानी पाकिस्तान अब सिर्फ देश नहीं किराए का एयर बेस बन चुका है। तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में तालिबान और पाकिस्तान के बीच बातचीत चल रही थी। मकसद था सीज फायर डील यानी युद्ध विराम।

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पाकिस्तान किसी भी कीमत पर यह समझौता करना

चाहता था क्योंकि तहरीक तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी के हमलों से अब पूरा पाकिस्तान थर्रा चुका है। पाकिस्तान के बॉर्डर इलाकों में रोज धमाके होते हैं और डर की बात यह है कि पाकिस्तान के अंदर की जनता तालिबान के साथ खड़ी है। वो सरकार से नहीं कट्टरपंथियों से वफादारी निभा रही है। इसी हालात का फायदा उठाकर तालिबान ने और पाकिस्तान से वो सच उगलवा लिया जो भारत कभी नहीं कर पाया। तालिबान ने पाकिस्तान से पूछा अफगानिस्तान में हाल ही में हुए

जो ड्रोन हमले हुए हैं वो किसने कराएं? पाकिस्तान ने पहले बचने की कोशिश की लेकिन जब तालिबान ने धमकी दी सीज फायर खत्म कर देंगे तो पाकिस्तान ने कहा वो हम नहीं वो एक विदेशी देश कर रहा है। तालिबान ने पूछा कौन सा देश? तो पाकिस्तान ने कहा हम नाम नहीं बता सकते लेकिन हमारे बीच एक गोपनीय यानी कि सीक्रेट डील हुई है। 

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पाकिस्तान ने पहली बार स्वीकार किया है कि उसके पास अमेरिका के साथ एक ऐसा समझौता है, जिसके तहत अमेरिकी ड्रोन उसके हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकते हैं। अफगान मीडिया TOLOnews की रिपोर्ट के अनुसार, यह खुलासा तुर्किये में हुई हालिया पाकिस्तान-अफगानिस्तान शांति वार्ता के दौरान हुआ। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत में कहा कि वह इस समझौते को तोड़ नहीं सकता, क्योंकि इससे ड्रोन संचालन को लेकर वॉशिंगटन को अनुमति मिली हुई है। अफगान वार्ताकारों ने पाकिस्तान से लिखित आश्वासन मांगा कि वह अमेरिकी ड्रोन को अपने हवाई क्षेत्र से अफगानिस्तान पर हमले की इजाजत नहीं देगा। शुरू में पाकिस्तानी दल ने इस पर सहमति जताई, लेकिन बाद में इस्लामाबाद से निर्देश मिलने के बाद उसने रुख बदल लिया और कहा कि उसके पास अमेरिकी ड्रोन पर नियंत्रण नहीं है और वह ISIS के खिलाफ कार्रवाई की गारंटी नहीं दे सकता। अफगान पक्ष ने दोहराया कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का मुद्दद्य पूरी तरह पाकिस्तान का आंतरिक मामला है और काबुल अपनी जमीन किसी अन्य देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने देगा।

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