By अभिनय आकाश | Jan 13, 2026
पाकिस्तान से बिगड़ते रिश्तों को देखते हुए तालिबान भारत का साथ चाहता है और भारत भी अफगानिस्तान के लोगों के लिए हर बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार है। आज भारत अफगान रिश्ते कितने मजबूत हो चुके हैं। दरअसल राजधानी दिल्ली में स्थित अफगान दूतावास के नए प्रभारी मुफ्ती नूर अहमद नूर ने विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी आनंद प्रकाश के साथ एक बड़ी बैठक की और यह जो तस्वीर आप देख रहे हैं, यह उसी वक्त की है। यह मुलाकात इसलिए खास है क्योंकि अगस्त 2021 में काबुल की सत्ता पर तालिबान के काबिज़ होने के बाद नूर अहमद नूर भारत में नियुक्त होने वाले पहले तालिबान के वरिष्ठ अधिकारी अफगान दूतावास ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बैठक की पूरी जानकारी शेयर की है।
दूतावास के मुताबिक मुफ्ती नूर अहमद नूर और विदेश मंत्रालय के जॉइंट सेक्रेटरी आनंद प्रकाश के बीच व्यापार को बढ़ाने और वीजा प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई। दूदावास ने साफ कहा है कि दोनों पक्षों ने भारत और अफगानिस्तान के बीच राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया है। इस बैठक का एजेंडा सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं था। इसमें भारत में रह रहे अफगान व्यापारियों, वहां से आए छात्रों और आम नागरिकों को आ रही परेशानियों को दूर करने पर भी बात हुई। हालांकि भारत ने अब तक तालिबान शासन को आधिकारिक मान्यता नहीं दी लेकिन मानवीय मदद और रणनीतिक जुड़ाव के जरिए भारत ने अफगानिस्तान के लोगों का दिल जीत रखा। एक तरफ जहां पाकिस्तान और तालिबान के बीच सीमा विवाद और सुरक्षा को लेकर तलवारें खींची हुई, वहीं भारत का तालिबान की तरफ हाथ बढ़ाना पाकिस्तान के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं। अफगानिस्तान को पता है कि विकास और व्यापार के लिए भारत से बेहतर कोई साझेदार नहीं हो सकता।
वहीं भारत भी चाहार और मध्य एशिया तक पहुंच के लिए अफगानिस्तान के साथ मजबूत रिश्तों को जरूरी मानता है। और जिस तरह से पिछले कुछ महीनों में लगातार अफगानिस्तान के मंत्रियों की बैठक भारत में लगी है। यह सबसे बड़ा झटका पाकिस्तान के लिए होगा। पाकिस्तान से बिगड़ते रिश्तों के बीच काबुल का दिल्ली की ओर यह झुकाव दक्षिण एशिया की जिओपॉलिटिक्स में एक नई इमारत लिखने जा रहा है।