Tamil Nadu CM विजय की सांसदों संग बैठक, Delimitation का विरोध करने का निर्णय

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 09, 2026

चेन्नई, आठ अगस्त तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की अध्यक्षता में शनिवार को गठबंधन के सहयोगी दलों और मित्र दलों से जुड़े राज्य के सांसदों की बैठक हुई। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का पूरी तरह विरोध करने का निर्णय लिया गया। बैठक का मुख्य विपक्षी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और प्रमुख द्रविड़ दलों और अन्नाद्रमुक ने बहिष्कार किया।

बयान के अनुसार, बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी सांसदों और राजनीतिक दलों से तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि केंद्र को प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को वापस लेना चाहिए, क्योंकि इससे तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व और महत्व पर असर पड़ेगा। बैठक के बाद पत्रकारों को जानकारी देते हुए कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार ने कहा कि बैठक में इस प्रस्तावित कवायद का विरोध करने का फैसला किया गया है, क्योंकि निर्वाचित निकायों में सांसदों की संख्या या संरचना में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘लोकसभा में 543 सदस्यों की संख्या में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है। इसी तरह, तमिलनाडु की 39 लोकसभा सीट में भी किसी बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं है।’’ कानून मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार चुनाव में आसानी से जीत हासिल करने और ‘चुनावी गणित’ को ध्यान में रखकर परिसीमन की यह पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को परिसीमन की कोई जरूरत नहीं है।

कुल मिलाकर, टीवीके सरकार का समर्थन करने वाले 19 सांसदों ने बैठक में हिस्सा लिया। वीसीके प्रमुख ने कहा, ‘‘हमने आम राय से एक प्रस्ताव पास किया है। (प्रस्तावित) परिसीमन की प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाना चाहिए।

लोकसभा सीट की मौजूदा कुल संख्या 543 ही रहनी चाहिए। राज्यों के लिए सीट का बंटवारा भी वैसा ही रहना चाहिए जैसा अभी है। इसका मतलब है कि अगर तमिलनाडु में हमारे 39 सांसद हैं, तो यह संख्या बनी रहनी चाहिए।

इसी सहमति को इस बैठक में एक प्रस्ताव के तौर पर पास किया गया है।’’ उन्होंने कहा सभी राज्यों के लिए इसे 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का विचार या आबादी के आधार पर संख्या बढ़ाने का रुख नहीं अपनाया जाना चाहिए और यही वह प्रस्ताव है जिसे इस बैठक में अपनाया गया है। बैठक में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि बड़ी संसद से लोकतंत्र की गुणवत्ता में सुधार नहीं होगा। चिदंबरम ने कहा, ‘‘हमारा रुख बिल्कुल साफ है कि लोकसभा में सांसदों की संख्या 543 पर ही स्थिर रहनी चाहिए।

यह संख्या स्थिर रहनी चाहिए और राज्यों के बीच सीट का बंटवारा भी उसी अनुपात में होना चाहिए जैसा अभी है। यानी 543 सदस्यों वाली लोकसभा में तमिलनाडु के 39 सदस्य ही होने चाहिए।’’ बैठक में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के सहयोगी दलों कांग्रेस, वीसीके, एमडीएमके और आईयूएमएल तथा मित्र दलों भाकपा और माकपा के सांसदों ने हिस्सा लिया। कुल मिलाकर 19 सांसद बैठक में शामिल हुए।

इसमें कांग्रेस के 11 सांसद; भाकपा, माकपा और वीसीके के दो-दो सांसद, तथा एमडीएमके व आईयूएमएल के एक-एक सांसद शामिल हुए। द्रमुक के सहयोगी दलों एमएनएम और डीएमडीके (जिनके राज्यसभा में एक-एक सदस्य हैं) ने भी बैठक में हिस्सा नहीं लिया। अन्नाद्रमुक (जिसके राज्यसभा में चार सांसद हैं) और उसकी सहयोगी पार्टी पीएमके (जिसके राज्यसभा में एक सदस्य हैं) ने इसमें हिस्सा नहीं लिया।

द्रमुक के 22 लोकसभा सदस्य और आठ राज्यसभा सदस्य हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम और वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन भी बैठक में शामिल हुए। विजय ने शनिवार को यहां कलैवनार अरंगम में स्थित एक सरकारी सभागार में बैठक की अध्यक्षता की।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि तमिलनाडु के मुख्य सचिव एम. साई कुमार ने छह और सात अगस्त को सांसदों को अलग-अलग आमंत्रण भेजा था। द्रमुक के वरिष्ठ नेता ए. राजा ने पेरम्बलूर में पत्रकारों से कहा कि यह ‘‘एक हंसी-मजाक वाली कवायद’’ है, क्योंकि टीवीके सरकार ऐसी चीज पर विचार कर रही है जिसके बारे में उसे कोई जानकारी ही नहीं है। अन्नाद्रमुक ने इस बैठक को ‘‘जल्दबाजी में रचा गया नाटक’’ करार दिया और कहा कि संसद में परिसीमन का कोई नया विधेयक पेश नहीं किया गया है और न ही इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा हुई है।

इसने पूछा, ‘‘मुख्यमंत्री जल्दबाजी में सांसदों की बैठक के नाम पर नाटक क्यों कर रहे हैं?’’ द्रमुक के एक सांसद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि सांसदों को आमंत्रित करना ही गलत कदम है, सरकार को सबसे पहले पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को बुलाना चाहिए था। उन्होंने कहा, ‘‘सांसदों का काम पार्टी के रुख का पालन करना है। यह बैठक अनावश्यक है।

द्रमुक तमिलनाडु के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमारे पार्टी प्रमुख एम. के. स्टालिन ने सबसे पहले परिसीमन के खिलाफ आवाज उठाई थी और राज्य के हितों की रक्षा के लिए इसके खिलाफ संघर्ष किया है।

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