By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 29, 2021
चेन्नई। मद्रास उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रभाव पर तमिलनाडु सरकार द्वारा समिति के गठन पर मंगलवार को राज्य सरकार से कई प्रश्न पूछे। अदालत ने पूछा कि क्या सरकार ने उच्चतम न्यायालय की अनुमति ली है और कहीं इससे न्यायालय के आदेश का उल्लंघन तो नहीं होता। सत्ताधारी दल द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने चुनाव में नीट परीक्षा को समाप्त करने का वादा किया था और हाल ही में मद्रास उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश ए के राजन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को समिति गठित करने के पहले उच्चतम न्यायालय से सहमति लेनी चाहिए थी। महाधिवक्ता आर. षण्मुगसुंदरम ने न्यायाधीशों को बताया कि समिति का गठन राज्य सरकार द्वारा लिया गया एक नीतिगत निर्णय था, जिसका वादा चुनाव में किया गया था। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों के हितों की रक्षा के लिए यह निर्णय लिया गया। इस पर पीठ ने कहा, “हो सकता है। लेकिन यदि यह उच्चतम न्यायालय के आदेश के विरुद्ध है, तो इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।” न्यायाधीशों ने राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर एक सप्ताह में जवाब तलब किया है।