By अंकित सिंह | Aug 11, 2026
मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा ने नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) को खत्म करने के लिए एक अहम प्रस्ताव पास किया। यह राष्ट्रीय स्तर की मेडिकल प्रवेश परीक्षा है। छात्रों पर इसके असर और इस अहम परीक्षा पर राज्य की स्वायत्तता को लेकर फैली चिंताओं के कारण यह कदम उठाया गया। यह घटनाक्रम तब हुआ जब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली 'तमिलगा वेट्री कझगम' (TVK) सरकार ने राज्य विधानसभा में NEET के खिलाफ एक अहम प्रस्ताव पेश किया।
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), ऑल-इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK), पट्टली मक्कल काची (PMK) और कई वामपंथी दलों ने NEET-विरोधी प्रस्ताव का समर्थन किया। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का NEET का विरोध, उनके पूर्ववर्ती और DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के लंबे समय से चले आ रहे रुख से काफी मिलता-जुलता है, जिन्होंने लगातार इस परीक्षा को खत्म करने की मांग की है।
यह घटनाक्रम हाल ही में हुए देशव्यापी आंदोलन के बीच सामने आया है – जिसका नेतृत्व 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने किया था – और जो NEET-UG 2026 से जुड़े पेपर लीक विवाद को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ था। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के साथ मिलकर किए गए इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत जून के आखिर में हुई थी और ये 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ खत्म हुए; प्रदर्शनकारी छात्रों की यह एक मुख्य मांग थी।
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