Tamil Nadu में TNKET योजना से टीबी मृत्यु दर में 38 फीसदी की गिरावट: BMJ रिपोर्ट

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Nov 08, 2026

(पायल बनर्जी) नयी दिल्ली, आठ नवंबर तमिलनाडु में स्वास्थ्य से जुड़ी पहल के कारण जुलाई, 2024 से दिसंबर, 2025 के बीच तपेदिक (टीबी) से होने वाली मृत्यु दर में 38 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इस पहल के तहत निदान के समय ही गंभीर रूप से बीमार मरीजों की पहचान कर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने को प्राथमिकता दी जाती है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (एनआईई) और तमिलनाडु राज्य टीबी प्रकोष्ठ द्वारा किए गए इस अध्ययन के अनुसार, यह सुधार तमिलनाडु कासनोई एराप्पिला थिट्टम (टीएनकेईटी) नामक कार्यक्रम के अंतर्गत देखा गया है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य को टीबी से होने वाली मौतों से मुक्त बनाना है। टीएनकेईटी के तहत अपनाए गए निगरानी और मूल्यांकन ढांचे से संबंधित रिपोर्ट शनिवार (सात नवंबर) को अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा पत्रिका बीएमजे ग्लोबल हेल्थ में एक प्रैक्टिस पेपर के रूप में प्रकाशित हुई है। बीएमजे ग्लोबल हेल्थ के दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रैक्टिस पेपर लेखकों को किसी समुदाय, राज्य या राष्ट्रीय स्तर के जमीनी अनुभवों के मूल्यांकन को साझा करने का अवसर देते हैं।

यह शोध पत्र उच्च तपेदिक के अत्यधिक मामलों वाले भारतीय राज्यों और अन्य देशों को निदान यानी बीमारी की पहचान के समय ही मरीजों की गंभीरता के आधार पर उनका वर्गीकरण करने और प्राथमिकता से इलाज देने की व्यवस्था को लागू करने तथा उसकी निगरानी करने में मार्गदर्शन प्रदान करेगा, ताकि टीबी से होने वाली मौतों को कम किया जा सके। शोधकर्ताओं द्वारा भारत के पहले राज्यव्यापी विभेदित टीबी देखभाल कार्यक्रम के रूप में वर्णित इस पहल को अप्रैल 2022 से दिसंबर 2025 तक लागू किया गया था। इसमें राज्य में मानक दवाओं से ठीक होने वाले सामान्य टीबी से पीड़ित 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वयस्कों को शामिल किया गया।

तमिलनाडु में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं में हर साल लगभग 60,000 वयस्क इस प्रकार की टीबी से पीड़ित पाए जाते हैं। टीएनकेईटी योजना के तहत, बीमारी के निदान के समय ही पांच स्वास्थ्य मानकों के आधार पर मरीजों की स्थिति का आकलन किया जाता है। इनमें बॉडी मास इंडेक्स (वजन और लंबाई का अनुपात), पेडल एडिमा (पैरों तथा टखनों में सूजन), श्वसन दर (सांस लेने की गति), ऑक्सीजन सेचुरेशन (रक्त में ऑक्सीजन का स्तर) और बिना किसी सहारे के खड़े होने की क्षमता शामिल है।

अत्यधिक कुपोषण, सांस लेने में गंभीर तकलीफ या शारीरिक रूप से बेहद कमजोर पाए जाने वाले गंभीर मरीजों को अस्पतालों में स्थानांतरित करने और अस्पताल में भर्ती रखकर इलाज के लिए प्राथमिकता दी जाती है। टीएनकेईटी की शुरुआत के समय राज्य में टीबी मृत्यु दर 6.3 प्रतिशत थी। इसके मुकाबले, अक्टूबर-दिसंबर 2024 के दौरान बीमार पाए गए लोगों में मृत्यु दर 38 प्रतिशत घटकर 3.9 प्रतिशत पर आ गई, जबकि जुलाई-सितंबर 2025 के दौरान मरीजों में यह कमी 56 प्रतिशत (घटकर 2.8 प्रतिशत) तक दर्ज की गई।

हालांकि, अध्ययन में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मरीजों की निगरानी प्रक्रिया (फॉलो-अप) में बड़ी कमी भी सामने आई है। निदान के समय गंभीर पाए गए मरीजों की दो महीने बाद दोबारा स्थिति जांचने का आंकड़ा किसी भी तिमाही में 35 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सका। यह दर्शाता है कि तमिलनाडु जैसे मजबूत स्वास्थ्य तंत्र वाले राज्य में भी अस्पताल से छुट्टी के बाद मरीजों की निरंतर देखभाल सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।

प्रमुख खबरें

त्योहारों से पहले FSSAI का देशव्यापी एक्शन, 82 करोड़ रुपये का मिलावटी सामान जब्त

Rekha Gupta ने दिल्लीवासियों से सैनिकों और पुलिसकर्मियों के नाम एक दीया जलाने का किया आह्वान

NSE प्रमुख Ashishkumar Chauhan ने कहा, घरेलू बचत और Foreign Investment से बढ़ेगी Growth

पुणे में आपसी विवाद पर व्यक्ति ने दोस्त पर फेंका Acid, बच्ची सहित 4 लोग झुलसे