By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 28, 2026
टाटा ट्रस्ट ने टाटा संस को एनबीएफसी और प्रमुख निवेश कंपनी (सीआईसी) के नियामकीय दायरे से बाहर लाने के लिए सोमवार को उसके पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा। इसके तहत समूह की दो कंपनियों का टाटा संस में विलय किया जाएगा, जिससे टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध निजी कंपनी के रूप में बनाए रखा जा सके। टाटा ट्रस्ट ने एक बयान में कहा कि इस पुनर्गठन के तहत टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस (टीईएसएस) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (टीसीई) का टाटा संस में विलय किए जाने का प्रस्ताव है।
यह प्रस्ताव टाटा संस के निदेशक मंडल और टाटा ट्रस्ट के बीच कंपनी के स्वामित्व ढांचे को लेकर बढ़ते मतभेदों के बीच आया है। नोएल टाटा की अध्यक्षता वाले ट्रस्ट टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किए जाने का विरोध करते रहे हैं। जुलाई, 2025 में दोनों प्रमुख टाटा ट्रस्ट ने कंपनी को गैर-सूचीबद्ध निजी इकाई बनाए रखने के प्रयास करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था।
आरबीआई द्वारा 2022 में टाटा संस को अपर लेयर एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किए जाने के बाद सूचीबद्धता का मुद्दा अहम हो गया। टाटा संस ने इस दर्जे से बाहर निकलने का अनुरोध किया था, जिसे आरबीआई ने सितंबर में खारिज कर दिया। टाटा संस के निदेशक मंडल की हाल में हुई बैठक में कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्धता की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किए जाने के बाद टाटा ट्रस्ट के साथ विवाद और गहरा गया है।
इस मामले में कानूनी राय भी ली जा रही है। टाटा ट्रस्ट के प्रस्ताव के मुताबिक, दोनों कंपनियों के टाटा संस में विलय से बनी इकाई की 31 मार्च, 2026 तक परिचालन आय 1,05,043 करोड़ रुपये होगी, जो उसकी कुल आय का 64.3 प्रतिशत होगी। इसके मुकाबले वित्तीय परिसंपत्तियों से आय 40,072 करोड़ रुपये होगी।
इस पुनर्गठित इकाई के पास 2,00,158 करोड़ रुपये की शुद्ध परिसंपत्तियां होंगी। इसमें समूह की कंपनियों में निवेश 1,77,120 करोड़ रुपये यानी कुल शुद्ध परिसंपत्तियों के 90 प्रतिशत से कम होगा। टाटा ट्रस्ट का कहना है कि इससे पुनर्गठित टाटा संस एनबीएफसी के मुख्य कारोबार संबंधी मानदंड और सीआईसी के लिए लागू शर्तों को पूरा नहीं करेगी।
टाटा ट्रस्ट ने कहा कि प्रस्तावित विलय से टाटा संस में परिचालन कारोबार और टाटा समूह की कंपनियों में निवेश, दोनों को रखने वाली उसकी पुरानी व्यवस्था फिर स्थापित होगी। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) भी 2004 में अलग कंपनी बनाए जाने से पहले टाटा संस का ही हिस्सा थी। प्रस्तावित विलय को आरबीआई के 2025 के एनबीएफसी स्वैच्छिक विलय संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
इसमें केंद्रीय बैंक से पहले अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना भी शामिल है। टाटा ट्रस्ट ने कहा कि पुनर्गठन पूरा होने के बाद टाटा संस सीआईसी के रूप में अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र आरबीआई को सौंप देगी। प्रस्ताव पर अभी टाटा संस के निदेशक मंडल को विचार करना है।
इसके अलावा आरबीआई की मंजूरी और विलय की प्रक्रिया पूरी होना भी जरूरी है।