TCS Nashik Controversy | फरार निदा खान HR हेड नहीं बल्कि 'टेलीकॉलर' है, सूत्रों ने किया बड़ा खुलासा

By रेनू तिवारी | Apr 17, 2026

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की नासिक यूनिट में सामने आए कथित सेक्स स्कैंडल और धर्मांतरण रैकेट मामले में एक नया मोड़ आया है। अब तक मुख्य आरोपी और कंपनी की 'HR हेड' बताई जा रही निदा खान के बारे में सूत्रों ने चौंकाने वाली जानकारी दी है। 'बिजनेस टुडे' के हवाले से खबर है कि निदा खान कंपनी में HR हेड नहीं, बल्कि एक टेलीकॉलर के रूप में कार्यरत थी। इस मामले ने पूरे देश को चौंका दिया है। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि आरोपी एक गैंग के तौर पर काम करते थे और मुख्य रूप से 18 से 25 साल की महिला कर्मचारियों को निशाना बनाते थे। अब तक नौ FIR दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें एक पुरुष कर्मचारी की FIR भी शामिल है। इस कर्मचारी ने धार्मिक उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण की कोशिश का आरोप लगाया है। शिकायतों में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान, जबरन मांसाहारी भोजन खिलाना, धार्मिक उत्पीड़न और दबाव डालना, और कुछ खास धार्मिक रीति-रिवाजों को मानने के लिए मजबूर करना जैसे आरोप शामिल हैं।

इससे पहले दिन में यह खबर आई थी कि यूनिट में कामकाज को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है और कर्मचारियों को अगले आदेश तक घर से ही काम करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, सूत्रों ने 'बिजनेस टुडे' को बताया कि गुरुवार को भी ऑफिस खुला रहा और करीब 60 कर्मचारी काम पर आए। ऑफिस को न तो सील किया गया है और न ही बंद किया गया है। कर्मचारियों को यह छूट दी गई है कि वे चाहें तो घर से काम करें या फिर ऑफिस आकर काम करें।

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जब TCS के सालाना खुलासों में 2021 से यौन उत्पीड़न की शिकायतों में बढ़ोतरी के बारे में पूछा गया, तो सूत्रों ने बताया कि यह बढ़ोतरी हाल के सालों में लागू किए गए आंतरिक सिस्टम और प्रक्रियाओं में सुधार की वजह से हुई है। खासकर, महिला कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित माहौल बनाने के मकसद से उठाए गए कदमों का इसमें अहम योगदान है। सूत्रों ने बताया कि इन पहलों की वजह से कर्मचारियों के बीच जागरूकता बढ़ी है और 'यौन उत्पीड़न रोकथाम' (POSH) ढांचे के तहत औपचारिक रूप से शिकायतें दर्ज करने की संभावना भी बढ़ी है।

सूत्रों ने संकेत दिया कि यह रुझान गलत व्यवहार की घटनाओं में आनुपातिक बढ़ोतरी को नहीं दिखाता, बल्कि यह शिकायत निवारण तंत्र में बढ़ते भरोसे और शिकायत दर्ज करने के माध्यमों तक बेहतर पहुंच को दर्शाता है। उन्होंने आगे कहा कि जागरूकता कार्यक्रमों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर लगातार ध्यान देने से आंतरिक रिपोर्टिंग व्यवस्था मज़बूत हुई है, जिससे कर्मचारी औपचारिक माध्यमों से अपनी चिंताओं को अधिक सहजता से उठा पा रहे हैं।

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