European Union History Part 4 | आज के समय में NATO का रोल |Teh Tak

By अभिनय आकाश | Apr 29, 2026

इंग्लिश में NATO और हिंदी में नॉटो बोले या फिर नाटो भी कह सकते हैं। लेकिन इसका फुल फॉर्म जरूर याद कर लीजिए शायद किसी परीक्षा में पूछ लिया जाए। नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन हिंदी में कहे तो उत्तरी अटलांटिक सन्धि संगठन।  क्या है नाटो जिससे रूस को इतनी नफरत है। कहानी की शुरुआत इतिहास से करते हैं। साल 1945 की बात है दूसरा विश्व युद्ध खत्म हो चुका था। सोवियत संघ और अमेरिकी दुनिया की दो महाशक्तियों के बीच प्रभुत्व की लड़ाई जिसके बारे में आपने पढ़ा भी होगा और हम भी आपको कई दफा बता चुके हैं। फुल्टन भाषण व टू्रमैन सिद्धांत के तहत जब साम्यवादी प्रसार को रोकने की बात कही गई तो प्रत्युत्तर में सोवियत संघ ने अंतर्राष्ट्रीय संधियों का उल्लंघन कर 1948 में बर्लिन की नाकेबंदी करते हुए और स्टालिन की रेड आर्मी ने बर्लिन में झंडा फहरा दिया था। अमेरिका को डर लगा कि स्टालिन के साम्यवाद की ये लहर ऐसी ही चली तो ये पश्चिमी यूरोप में भी पहुंच जाएगी। 1948 में बर्लिन की नाकेबंदी की घटना ने अमेरिका के डर को और भी पुख्ता कर दिया। उसे लगा कि सोवियत संघ से निपटने के लिए एकजुट होने का वक्त आ गया है। इसी क्रम में यह विचार किया जाने लगा कि एक ऐसा संगठन बनाया जाए जिसकी संयुक्त सेनाएं अपने सदस्य देशों की रक्षा कर सके।  4 अप्रैल 1949 को ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैण्ड तथा लक्सेमबर्ग ने बूसेल्स की संधि पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य सामूहिक सैनिक सहायता व सामाजिक-आर्थिक सहयोग था। ये पूंजीवादी देशों की सोवियत विस्तार को चुनौती देने के लिए बना सैन्य संगठन था। इन देशों ने एक दूसरे को एक वादा किया है। कैसा वादा- एक दूसरे को खतरे की स्थिति में सहायता देने का वादा यानी सामूहिक सुरक्षा का वादा। किसी एक देश पर हमला तो माना जाएगा सबके सब देशों पर हमला।

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नाटो के 30 सदस्य देशों की सूची:

अलबानिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, कनाडा, क्रोएशिया, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्तोनिया, फ़्रान्स, जर्मनी, यूनान, हंगरी, आइसलैण्ड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, तुर्की, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका, मॉन्टिनीग्रो

नाटो और रूस की ताकत

आंकड़ों से पता चलता है कि रूस की सेना अमेरिका के बाद दूसरी बड़ी सेना है। सशस्त्र बलों के आंकड़े बताते हैं कि देश में लगभग 1,154,000 सक्रिय सैनिक हैं। सेना को रिजर्व में रखे गए लगभग 250,000 और सैनिकों का समर्थन प्राप्त है। रूस के पास लगभग 6,400 वॉरहेड की आपूर्ति के साथ, परमाणु हथियारों का दुनिया का सबसे विशाल संग्रह है। नाटो सदस्यों के पास लगभग 1,346,400 कर्मियों की सेना है। उनमें से मोटे तौर पर 165000 सैनिक तैनात हैं, जबकि 799,500 रिजर्व सैनिक हैं। नाटो 30 देशों का एक ग्रुप है। लेकिन जो सैनिक सक्रिय हैं, वही युद्ध की स्थिति में सबसे पहले उतारे जाएंगे।

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