Nandigram History IV | वाम सरकार के फैसले से किसानों के मन में क्यों पैदा होने लगी थी आशंकाएं?|

By अभिनय आकाश | May 20, 2023

बुद्धदेव भट्टाचार्य ने की2007 में जब नंदीग्राम में हिंसा हुई तब राज्य में वाम मोर्चे की सरकार थी और मुख्यमंत्री थे बुद्धदेव भट्टाचार्य। उन्होंने वर्ष 2000 में तब वाम मोर्चे की सत्ता की बागडोर संभाली जब 1977 से मुख्यमंत्री रहे ज्योति बसु ने 86 साल की उम्र में जिम्मेदारी से हटने का फैसला किया। बुद्धदेव भट्टाचार्य ने वामपंथियों के उद्योग विरोधी होने की छवि को बदलने की कोशिश की। इसी के तहत 2005 में जब भारत सरकार ने देश भर में केमिकल हब बनाने का विचार किया तो नंदीग्राम का भी नाम आया। जिसके बाद ये तय किया गया कि बंदरगाह वाले औद्योगिक शहर हल्दिया के पास स्थित नंदीग्राम को एक पेट्रोलियम, केमिकल और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र तथा एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) के रूप में विकसित किया जाएगा। 

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नंदीग्राम में पार्टी के समर्थकों नेताओँ ने विरोधी किसानों का एक संगठन खड़ा कर दिया जिसका नाम रखा गया- भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति। जनवरी 2007 से बात बढ़ने लगी और जनवरी से मार्च के बीच कई बार पुलिस और सत्ताधारी दल के सदस्यों और ग्रामीणों के बीच संघर्ष हुआ। नंदीग्राम को इन 14 सालों में दुनिया ने जाना तो जरूर लेकिन इसके लिए इस गांव को कई कुर्बानियां देनी पड़ी। 2005-06 तक एकदम शांत सा रहने वाला गांव 2007-08 में लगभग 11 महीनों तक सिविल वार की स्थिति में रहा। 

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