India Pak Journey Part 2 | कश्मीर पर वार्ता हुई विफल, दूसरी बार पाक ने किया हमला

By अभिनय आकाश | Aug 30, 2025

दशक की शुरुआत बेहतर संबंधों के वादे के साथ हुई। 1960 में भारत और पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए, जो विश्व बैंक की मध्यस्थता वाला एक समझौता था, जिसके तहत वे सिंधु बेसिन की उन छह नदियों के पानी को साझा करने पर सहमत हुए। यह संधि भारत को तीन पूर्वी नदियों: रावी, व्यास और सतलुज के जल तक पहुँच प्रदान करती है। बदले में, पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों: सिंधु, झेलम और चिनाब का जल मिलता है। 22 अप्रैल को पहलगाम हमले के बाद, भारत ने इस संधि में अपनी भागीदारी स्थगित कर दी। लेकिन ये  समझौता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसे जल-बंटवारे समझौते का एक ज्वलंत उदाहरण रहा है जो कई युद्धों के बाद भी कायम रहा।

ऑपरेशन डेजर्ट हॉक 

1965 युद्ध की शुरुआत अप्रैल में रन ऑफ कच्छ में पाकिस्तान के ऑपरेशन डेजर्ट हॉक से हुआ। भारत ने 28 अगस्त को हाजीपीर पर कब्जा कर लिया। इसके तुंरत बाद पाकिस्तान ने अपना तीसरा ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम शुरू कर दिया। 1 सितंबर को छम्ब से भारत में घुसकर वह अखनूर पुल तक आ पहुंचा। यहां से पाकिस्तान का ध्यान बंटाने के लिए भारत ने 6 सितंबर को पंजाब फ्रंट खोला और फौजें बरकी तक जा पहुंची, लाहौर अब दूर नहीं था। 1965 में पाकिस्तानियों ने भारत को सैन्य रूप से कम करके आंका था। वे सफल नहीं हुए। 1965 के युद्ध के समय सैन्य रूप से भारत का पलड़ा भारी था, संयुक्त राष्ट्र महासचिव यू थांट ने 3 सितंबर, 1965 को इस मामले को सुरक्षा परिषद में लाया। पहले पीएम शास्त्री ने एमसी छागला हमारे प्रतिनिधि के रूप में भेजने का निर्णय लिया। लेकिन फिर भुट्टो द्वारा कश्मीर राग और बदजुबानी का मुकाबला करने के लिए अपने विदेश मंत्री सरदार स्वर्ण सिंह को भेजने का फैसला किया। सिंह और भुट्टो एक-दूसरे को जानते थे क्योंकि वे लगभग छह महीने से बातचीत कर रहे थे, और सिंह के पास बेपरवाह लंबे समय तक बोलने में सक्षम होने का एक बड़ा उपहार था।

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