By अभिनय आकाश | May 28, 2024
एक बार फिर हमास और इजरायल के बीच जंग छिड़ी हुई है। दोनों एक दूसरे पर हमला कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट का हालिया घटनाक्रम हमास के ताजा हमले की एक बड़ी वजह है। इजरायल का यूएई से समझौता हुआ। जिसे अब्राहम समझौता नाम दिया गया। इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच 13 अगस्त 2020 को हुआ था। उसी रात 11 सितंबर को इन दोनों देशों ने समझौता पर हस्ताक्षर किए। अब्राहम के नाम की खासियत ये है कि इसे इस्लाम, ईसाई और यहूदी तीनों ही धर्मों में पवित्रता के साथ लिया जाता है। इसका मतलब सहयोग की भावना है। अब्राहम समझौते का मुख्य मकसद अरब और इजरायल के बीच आर्थिक, राजनयिक और सांस्कृतिक स्तर पर संबंधों को सामान्य बनाना था। सितंबर 2020 में हस्ताक्षरित ऐतिहासिक अब्राहम समझौते ने इज़राइल और यूएई और बहरीन के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की, जिससे 41 साल का गतिरोध टूट गया और भूराजनीतिक भूकंप आया। सूडान और मोरक्को ने भी इसका अनुसरण किया।
अब्राहम समझौते के तहत, इज़राइल किसी भी विलय योजना को रोकने के लिए सहमत हुआ। हालाँकि, फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में यहूदी बस्तियों के निर्माण पर इज़राइल की रुको और जाओ नीति को रोका नहीं गया था। पीएम नेतन्याहू की वर्तमान सरकार में अति-दक्षिणपंथी मंत्री हैं जो पूरे वेस्ट बैंक पर कब्ज़ा करना चाहते हैं और शेष सभी फिलिस्तीनियों को बसने के लिए अन्य अरब देशों में भेजना चाहते हैं। वेस्ट बैंक में यहूदी बसने वालों और फिलिस्तीनियों के बीच झड़पें कई गुना बढ़ गई हैं और 2023 में सबसे ज्यादा लोग हताहत हुए हैं। यानी अब फिलिस्तीन की साइड लेने के लिए तुर्की और ईरान शेष रह गए। ईरान पहले से ही दुनिया में अलग थलग है और एर्दोगान के नेतृत्व में तुर्की के मुस्लिम लीडर बनने को इस्लामिक देश सपोर्ट नहीं करते। तो आज हमने आपको हमास की कहानी बताई। अब इजरायल फिलिस्तीन विवाद के आखिरी एपिसोड में आपको हमेशा फिलिस्तीन समर्थक रहे भारत की इजरायल संग रिश्तों की कहानी बताएंगे। कैसे आखिर छोटा सा दिखने वाला देश देखते ही देखते बन गया ऐसा दोस्त जिसका दिल भारत के लिए धड़कता है।