By अभिनय आकाश | Jul 24, 2026
फुटबॉल के फीफा महाकुंभ के बाद अब खेल प्रेमियों पर राष्ट्रमंडल खेलों का खुमार चढ़ने वाला है, क्योंकि कॉमनवेल्थ गेम्स का रण आज (23 जुलाई) से 2 अगस्त तक सजने जा रहा है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में भारत का तिरंगा लहराने के लिए भारतीय एथलीटों का दल पूरी तरह से तैयार होकर मैदान में उतर चुका है। इस बार भारत की ओर से पैरा एथलीटों सहित कुल 125 खिलाड़ी (77 पुरुष और 48 महिला) पदक जीतने का सपना लेकर स्कॉटलैंड पहुंचे हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत हमेशा से शीर्ष प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल रहा है और इस बार भी उम्मीदें आसमान पर हैं। अगर पिछले रिकॉर्ड्स पर नजर डालें, तो बर्मिंघम 2022 के खेलों में भारतीय सूरमाओं ने कुल 61 पदक अपने नाम किए थे। 2022 के इन मुकाबलों में भारत की झोली में शानदार प्रदर्शन करते हुए 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य पदक आए थे। राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत से लेकर अब तक भारत ने कुल 564 पदकों की विशाल ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारत के इस ऑल-टाइम ऑल-स्टार रिकॉर्ड में 203 गोल्ड, 190 सिल्वर और 171 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। गलास्गो की सरजमीं पर उतरे भारतीय जांबाज इस बार भी पुराने सभी रिकॉर्ड्स को तोड़ते हुए एक नया इतिहास रचने के इरादे से आए हैं। देशभर के करोड़ों खेल प्रेमियों की निगाहें अब ग्लासगो पर टिकी हैं, जहाँ से एक बार फिर पदकों की स्वर्णिम बारिश की उम्मीद जताई जा रही है।
इसका सीधा जवाब है - आर्थिक कारण। शुरुआत में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में होने वाले थे। लेकिन, इवेंट से तीन साल पहले ही विक्टोरिया ने बढ़ती लागत का हवाला देते हुए गेम्स की मेज़बानी से हाथ खींच लिए। इससे कई लोगों ने खेलों की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए, कुछ ने तो इसे विलुप्त तक घोषित कर दिया। तभी ग्लासगो ने हस्तक्षेप किया। लेकिन उन्होंने कहा कि उनके पास पूर्ण पैमाने पर आयोजन की तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं है, इसलिए उन्होंने खेलों का एक छोटा, संक्षिप्त और सीमित संस्करण प्रस्तावित किया। इसके अलावा, पैसे बचाने के लिए 10 खेलों का आयोजन सिर्फ़ चार जगहों पर किया जाएगा, जो सभी सेंट्रल ग्लासगो में 12 किलोमीटर के दायरे में होंगे। साथ ही, एथलीट और सपोर्ट स्टाफ़ एथलीट विलेज के बजाय होटलों में ठहरेंगे। ओपनिंग और क्लोजिंग सेरेमनी भी छोटे स्तर पर होंगी।
ग्लासगो खेलों के संक्षिप्त होने के कारण, भारत के पदक जीतने की संभावनाएं काफी कम हो गई हैं। उदाहरण के लिए, बैडमिंटन को खेलों से हटा दिया गया है। पिछले संस्करण में, भारत ने इस खेल में छह पदक जीते थे, जिनमें लक्ष्य सेन और पीवी सिंधु द्वारा जीते गए स्वर्ण पदक शामिल थे। कुश्ती, जिसने भारत को 2022 में 12 पदक दिलाए थे, इस बार के टूर्नामेंट में शामिल नहीं है। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स से टेबल टेनिस को भी हटा दिया गया है जिसमें सात मेडल मिले थे> साथ ही हॉकी और क्रिकेट को भी, जिनमें भारत ने कुल तीन मेडल जीते थे। असल में 2022 बर्मिंघम गेम्स में भारत के जीते 61 मेडलों में से 30 ऐसे खेलों से आए थे जिन्हें ग्लासगो गेम्स में शामिल नहीं किया गया है। भारत के पूर्व हॉकी कप्तान और ओलंपियन विरेन रासकिन्हा ने एक स्पोर्ट्स इवेंट में कहा कि इन खेलों को हटाने से एक खालीपन आ जाएगा। यह कॉमनवेल्थ गेम्स बहुत अलग होने वाला है, क्योंकि हमारे कई मेडल दिलाने वाले खेल इसमें शामिल नहीं हैं। इसलिए, इसका असर हमारे मेडल टैली पर 100 प्रतिशत पड़ेगा।
नीरज चोपड़ा (भाला फेंक)
ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा फिर भारत की सबसे बड़ी पदक उम्मीद होंगे। उनसे स्वर्ण पदक की उम्मीद की जा रही है।
मीराबाई चानू (वेटलिफ्टिंग)
मीराबाई चानू अब तक राष्ट्रमंडल खेलों में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीत चुकी हैं। अगर वह इस बार भी स्वर्ण जीतती हैं तो लगातार तीसरे राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगी।
लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा मुक्केबाजी)
टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता और 2023 की विश्व चैंपियन लवलीना बोरगोहेन भारतीय महिला मुक्केबाजी टीम की सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में शामिल हैं।
गुरिंदरवीर सिंह (100 मीटर दौड़)
भारत के सबसे तेज धावक गुरिंदरवीर सिंह ने इस साल 10.09 सेकंड का समय निकालकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। राष्ट्रमंडल खेलों में उनसे शानदार प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
प्रणति नायक (आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स)
भारतीय जिम्नास्टिक्स की अनुभवी खिलाड़ी प्रणति नायक पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों का पदक जीतने के इरादे से ग्लासगो उतरेंगी।
भारत के युवा खिलाड़ियों पर भी रहेंगी नजर
इस बार भारतीय टीम में सर्वेश कुशारे और ज्ञानेश्वरी यादव जैसे युवा खिलाड़ी भी शामिल हैं। इन खिलाड़ियों से भविष्य के बड़े सितारे बनने की उम्मीद की जा रही है।