By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 03, 2022
नयी दिल्ली। भारत का ‘तेजस’ हल्का लड़ाकू विमान मलेशिया की पहली पसंद बनकर उभरा है और यह दक्षिण-पूर्व एशियाई देश अपने पुराने हो चुके लड़ाकू विमानों को बदलना चाहता है। एचएएल निर्मित तेजस ने प्रतिस्पर्धा में शामिल चीनी और दक्षिण कोरियाई विमानों को पछाड़ दिया है। एचएएल के चेयरमैन ने कहा कि चीनी विमान जेएफ-17, दक्षिण कोरियाई विमान एफए-50 और रूस के मिग-35 तथा याक-130 से कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद भी मलेशिया ने तेजस पर भरोसा जताया है। तेजस विमानों को लेकर दोनों पक्ष वार्ता कर रहे हैं, ताकि खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के प्रबंध निदेशक और चेयरमैन आर माधवन ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘चीन के जेएफ-17, दक्षिण कोरिया के एफए-50, रूस के मिग-35 और याक-130 लड़ाकू विमानों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद मलेशिया तेजस की खरीद के लिए बात कर रहा है।’’ भारत ने पैकेज के तहत मलेशिया में एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल) सुविधा स्थापित करने की पेशकश की है, क्योंकि मॉस्को पर लगे प्रतिबंध के कारण रूस से खरीदे गये एसयू-30 विमानों के कलपुर्जों की खरीद में मलेशिया को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। यह बड़ा सौदा क्या जल्द पूरा होगा?
माधवन ने कहा, ‘‘वास्तव में हम अकेले हैं जिन्होंने उनकी जरूरत की हर चीज को कवर किया और उनकी बजट आवश्यकताओं को भी पूरा किया।’’ एचएएल प्रमुख ने कहा, ‘‘कोई भी उन्हें इतनी तेजी से अपग्रेड की पेशकश नहीं करेगा, जितना तेज हम करेंगे। उनके पास तेजस मार्क 2 में एक विकल्प उपलब्ध होगा और वे एएमसीए के बारे में सोच भी सकते हैं।’’ मलेशिया कितने विमानों की खरीद पर विचार कर रहा है, यह तत्काल स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि एचएएल मलेशिया को उसी स्तर की सेवाएं देगा, जैसी वह भारतीय वायुसेना को देता रहा है। यह पूछे जाने पर कि क्या मलेशिया से एचएएल के अनुबंध से भारतीय वायुसेना को तेजस जेट की आपूर्ति प्रभावित होगी। इस पर माधवन ने कहा कि आवश्यकता के आधार पर विमान का उत्पादन बढ़ाया जाएगा। योजना के मुताबिक एचएएल वर्ष 2025 में भारतीय वायुसेना को जेट (एमके-आईए संस्करण) देना शुरू कर देगा और सभी 83 जेट विमानों को 2030 तक सौंपना होगा।