By Ankit Jaiswal | Oct 15, 2026
अब मोबाइल पर आने वाली अनजान कॉल की पहचान करना पहले के मुकाबले आसान हो सकता है। भारत में 1 नवंबर से ज्यादातर अनजान नंबरों से आने वाली कॉल पर सिर्फ नंबर ही नहीं, बल्कि फोन करने वाले का नाम भी दिखाई देगा। दूरसंचार विभाग ने सभी दूरसंचार सेवा कंपनियों को इस व्यवस्था को लागू करने का निर्देश दिया है। इसके तहत कॉल करने वाले का नाम और नंबर एक साथ दिखेंगे, जिससे लोगों को अनजान कॉल पहचानने में मदद मिल सकती है।
नई व्यवस्था के तहत, यदि किसी व्यक्ति का मोबाइल नंबर पहले से आपके फोन में सेव है, तो स्क्रीन पर उसी नाम को प्राथमिकता दी जाएगी जो आपने अपने संपर्कों में दर्ज किया है। लेकिन यदि नंबर सेव नहीं है, तो कॉल करने वाले के दूरसंचार सेवा प्रदाता के रिकॉर्ड में दर्ज नाम दिखाई देगा। इससे अनजान नंबरों से आने वाली कॉल की पहचान करना आसान हो सकता है।
हालांकि, विदेश से आने वाली कॉल के मामले में स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नाम नहीं दिखाया जाएगा। ऐसी स्थिति में केवल “इंटरनेशनल कॉल” लिखा आएगा। वहीं, जिन लोगों ने कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन प्रतिबंध यानी सीएलआईआर सुविधा का इस्तेमाल कर अपना नंबर या पहचान छिपाने का विकल्प चुना है, उनके नाम भी स्क्रीन पर नहीं दिखाए जाएंगे।
बता दें कि शुरुआती चरण में यह सुविधा 4जी और उससे आगे की तकनीक वाले मोबाइल नेटवर्क पर लागू होगी। दूरसंचार कंपनियों ने इन नेटवर्क पर इसका परीक्षण किया है। वहीं, 2जी, 3जी और लैंडलाइन नेटवर्क पर इसे लागू करने के मामले में अलग से विचार किया जाएगा। विभाग का कहना है कि इन नेटवर्क के बारे में जांच के बाद फैसला लिया जाएगा।
इस व्यवस्था को चलाने के लिए हर दूरसंचार कंपनी को अपने ग्राहकों के मोबाइल नंबर और उनके नाम का रिकॉर्ड रखना होगा। जब किसी नंबर से कॉल आएगी, तो रिसीवर की कंपनी दूसरी कंपनी के रिकॉर्ड से नाम की जानकारी हासिल करेगी। विभाग ने यह भी कहा है कि व्यवस्था को इस तरह बनाया जाए कि कॉल खत्म होने के बाद नाम की जानकारी खोजने से जुड़ा रिकॉर्ड अपने आप सुरक्षित न रहे। इसका मकसद लोगों की निजता की रक्षा करना है।
व्यापार और बड़ी संख्या में मोबाइल कनेक्शन रखने वाले संस्थानों को इस नियम में कुछ छूट दी गई है। ऐसे ग्राहक चाहें तो रिकॉर्ड में दर्ज व्यक्तिगत नाम के बजाय अपने कारोबार का पंजीकृत नाम दिखाने का विकल्प पा सकते हैं। इसके लिए नाम का व्यापार चिह्न पंजीकरण कार्यालय में दर्ज होना या वस्तु एवं सेवा कर पोर्टल पर व्यापारिक नाम के रूप में पंजीकृत होना जरूरी होगा। दूरसंचार कंपनियों को नाम दिखाने से पहले मूल दस्तावेजों के आधार पर उसकी जांच करनी होगी।
गौरतलब है कि इस व्यवस्था की सिफारिश भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने फरवरी 2024 में की थी। इसके अलावा, दूरसंचार विभाग ने नवंबर 2025 में पहचान संबंधी दस्तावेजों और ग्राहकों की जानकारी से जुड़े मामलों के लिए अलग निर्देश भी जारी किए थे। नई सुविधा से फर्जी कॉल और अनजान नंबरों से होने वाली परेशानी कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है, हालांकि इसका वास्तविक असर लागू होने के बाद ही साफ होगा। दूरसंचार कंपनियों को इस सुविधा से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए तय समय सीमा वाली व्यवस्था भी बनानी होगी, ताकि नाम गलत दिखने या अन्य समस्याओं पर ग्राहक अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।