खर्चों का जन्म (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | May 09, 2025

उन्होंने सोचा ज़िंदगी का मज़ा ले लें, बच्चे पैदा करने बारे बाद में सोचेंगे। ज़िंदगी का मज़ा लेते लेते पांच साल बीत गए। माता पिता भी कहते कहते थक गए उन्होंने कहना लगभग बंद कर दिया। जब उन्होंने परिवार बढ़ाने बारे प्लान किया तो पता लगा कि बच्चा पैदा करने की कीमत बहुत बढ़ गई है। अब वे एक अच्छी, अनुभवी, स्तरीय विशेषज्ञ ढूंढने लगे। माहौल में असुरक्षा बढ़ती जा रही है इसलिए यह ध्यान रखना भी ज़रूरी रहा कि बच्चे के दुनिया में आने और उसके बाद की यात्रा को सुखद और सुरक्षित बनाने के लिए चिकित्सक तो बढ़िया होना ही चाहिए।

   

मित्रों से पूछ, कमेंट्स पढ़ने और निर्णय लेने के बाद शहर के प्रसिद्ध हस्पताल में कुशल चिकित्सक से समय खरीदा। उस दिन की छुट्टी भी स्वीकृत करवाई। सरकारी नौकरी होती तो थोड़ी देर के लिए जाकर वापिस आकर फिर चाहे ज़्यादा देर तक न जाते मिलने का समय तय था तो समय से पहले पहुंचे हालांकि बारी दो घंटे के बाद आई। मोटी फीस पहले ही गूगल ने मदद कर उनके खाते में जमा करवा दी थी। पहली ही मुलाकात में परम्परागत, व्यावसायिक, सच लगने वाली गहरी मुस्कराहट देते हुए विशेषज्ञ ने कहा, हमारा बारह साल का गहन अनुभव है। हमारे पास आपका आना आनंददायक रहेगा।

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उनका बाक़ी कहा, जो मुझे समझ में आया वह कुछ ऐसा रहा। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि आपको कई बार लग सकता है कि हम पैसे ज्यादा ले रहे हैं। हमारा पैकेज इसलिए ऐसा है क्यूंकि पहले हमने पैसा लगाया भी है। बैंक से कर्ज़ भी ले रखा है। बड़ी और ऊंची बिल्डिंग बनाई है। बढ़िया डॉक्टर, नर्सें और दूसरा स्टाफ रखा है जो कदम कदम पर आप जैसे लोगों की सेवा करने के लिए है। सेवा करेंगे तो मेवा भी तो मिलना चाहिए। खूब मेहनत करने के बाद हमने नाम कमाया है और अब पैसे बनाने का समय है।

डॉक्टर ने सलाह दी कि आज के बाद आपने हर स्थिति में खुश रहना है। अपना ख्याल रखना है। पैसे की परवाह नहीं करनी है। यह तो आता जाता रहता है। आपकी और आपके बेबी की केयर करने के लिए हमारी पूरी टीम है। संभावित मां को अगली तारीख पर कुछ टैस्ट कराने थे जो उन डॉक्टर की अपनी लैब में ही होने थे। टैस्ट कराकर डॉक्टर को दिखाने भी थे। दिखाने से पहले उनकी फीस स्वाभाविक रूप से जमा होनी थी। रिपोर्ट डॉक्टर को दिखाई, उन्होंने रिपोर्ट देखकर कहा सब ठीक है, अब मैं एक अल्ट्रासाउंड लिख देती हूं। अल्ट्रासाउंड भी उनकी अपनी ही लैब में होना था और डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लेकर रिपोर्ट दिखानी थी। रिपोर्ट आ गई, फिर से डॉक्टर की फीस जमा करवाई और रिपोर्ट दिखाई। रिपोर्ट देखते ही, वही सच्ची दिखने वाली झूठी मुस्कराहट देते हुए कहा, अब टैस्ट कब कब होने हैं, बाहर बैठी सिस्टर बता देंगी। बाहर बैठी सिस्टर ने मुख्य अध्यापक की तरह मुस्कराहट देकर एक परचा थमा दिया जिसमें तिथि अनुसार अंकित था कि कब कौन सा टैस्ट या अल्ट्रासाउंड होना है। शिशु जन्म से पहले खर्चों का जन्म हो चुका था।

- संतोष उत्सुक

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