Book Review। 'एक देश-एक चुनाव: भारत में राजनीतिक सुधार की संभावना' चुनावी प्रक्रिया की जटिलताओं को समझाती है किताब

By टीम प्रभासाक्षी | Mar 27, 2024

देश में एक देश एक चुनाव को लेकर चर्चा छिड़ी हुई है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली समिति ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी। इस बीच, 'एक देश-एक चुनाव: भारत में राजनीतिक सुधार की संभावना' नामक यह पुस्तक आम जन के बीच सार्थक बहस को आगे बढ़ाने का काम करेगी। इस किताब के लेखक अनूप बरनवाल 'देशबंधु' हैं, जो पेशे से अधिवक्ता हैं, लेकिन अपने परिचय में अधिवक्ता की जगह विधिवक्ता शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं। 

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लेखक ने किताब में एक देश-एक चुनाव की चुनौतियों और समाधान के बारे में, नगरम: शासन-विकेंद्रीकरण की दिशा में और राजनीतिक पार्टी: वंशवाद से लोकतांत्रिक मूल्य की दिशा में तथ्यात्मक चर्चा की। किताब में इन्हीं तीन खंडों का उल्लेख है।

लेखक ने किताब की शुरुआत चुनावी पृष्ठभूमि से की और इसे सटीकता के साथ भविष्य के साथ जोड़ा है, जो लोगों को विषय के साथ बांधकर रखने का भरसक प्रयास है।  

अनूप बरनवाल 'देशबंधु' ने किताब में सरल भाषा में आंकड़ों को प्रस्तुत किया है और वह सराहनीय है, क्योंकि टेबल के जरिये आंकड़ों को समझना मौजूदा परिस्थितियों में आसान हो जाता है। हालांकि, किताब में अखबार के आंकड़ों को प्रदर्शित किया गया है। अगर किसी सरकारी स्त्रोत का इस्तेमाल होता तो इससे विश्वसनीयता और भी ज्यादा बढ़ जाती।

पुस्तक लेखन में अक्सर देखा जाता है कि लेखक किसी एक विचार से प्रेरित हो जाता है और वह उसी एक विचार के इर्द गिर्द एक दुनिया पिरोने की कोशिश में जुटा रहता है, लेकिन इस पुस्तक में ऐसा दिखाई नहीं देता है, बल्कि लेखक की गंभीरता और विचारों की स्पष्टता उभर कर सामने आ रही है और इसमें तथ्यों को प्रधानता दी गई है।

इस किताब में लेखक ने स्पष्ट और सरल भाषा का उपयोग किया है, जो पुस्तक को आम पाठकों के लिए भी सुलभ बनाता है। 'एक देश-एक चुनाव: भारत में राजनीतिक सुधार की संभावना' नामक किताब उन सभी के लिए उपयोगी है, जो भारत की राजनीति और चुनावी प्रक्रिया में रुचि रखते हैं और उसे बारीकी से समझना चाहते हैं।

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