Palghar में सुरंग ब्रेकथ्रू के साथ Bullet Train को मिली नई रफ्तार, पहाड़ काट कर भविष्य की पटरी बिछाई गई

By नीरज कुमार दुबे | Jan 02, 2026

भारत की महत्वाकांक्षी मुंबई अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना ने एक अहम पड़ाव पार कर लिया है। महाराष्ट्र के पालघर जिले में पहाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाली सबसे लंबी सुरंग का ब्रेकथ्रू सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। हम आपको बता दें कि यह इस हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की पहली पर्वतीय सुरंग है, जिसे तकनीकी रूप से सबसे कठिन माना जा रहा था। इस उपलब्धि के साथ ही परियोजना को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच निर्माण कार्य को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद जगी है।


हम आपको बता दें कि इस बुलेट ट्रेन कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग पांच सौ आठ किलोमीटर है, जिस पर बारह स्टेशन प्रस्तावित हैं। यह ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच की दूरी को लगभग दो घंटे में तय करने में सक्षम होगी। परियोजना में अधिकतर ट्रैक एलिवेटेड वायडक्ट पर बनाया जा रहा है, ताकि रफ्तार और सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सकें। सुरंग निर्माण के साथ-साथ पुलों और नदी पार संरचनाओं का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इसे भी पढ़ें: Bullet train का इंतजार खत्म! 2027 में Mumbai-Ahmedabad के बीच शुरू होगी पहली हाई-स्पीड ट्रेन, जानें Details

पालघर की यह सुरंग खास इसलिए भी है क्योंकि इसका निर्माण जटिल भूगर्भीय परिस्थितियों में किया गया है। चट्टानी जमीन, पानी का दबाव और पर्यावरणीय चुनौतियों के बावजूद इंजीनियरों और मजदूरों ने इस चरण को पूरा कर दिखाया। रेल मंत्रालय का कहना है कि यह सफलता आने वाले समय में अन्य सुरंगों और कठिन हिस्सों के निर्माण का रास्ता आसान बनाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि बुलेट ट्रेन केवल आधुनिक तकनीक का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय विकास को गति देने वाली परियोजना है।


देखा जाये तो पालघर की सुरंग का ब्रेकथ्रू केवल इंजीनियरिंग की जीत नहीं है, यह उस मानसिकता पर भी करारा प्रहार है जो हर बड़े भारतीय प्रोजेक्ट को पहले दिन से असफल घोषित कर देती है। वर्षों तक कहा गया कि यह परियोजना बहुत महंगी है, बहुत कठिन है और भारत इसके लायक नहीं है। आज वही पहाड़ चुप हैं और आलोचक बगले झांक रहे हैं।


यह सवाल उठाना जायज है कि इतना पैसा क्यों खर्च किया जा रहा है, लेकिन यह पूछना भी उतना ही जरूरी है कि क्या भारत हमेशा छोटे सपनों तक सीमित रहेगा। जब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हाई स्पीड रेल को विकास का औजार बना चुकी हैं, तो भारत को इससे वंचित रखने की जिद आखिर किसके हित में है। बुलेट ट्रेन आराम या शान का प्रतीक नहीं, बल्कि समय की बचत, उत्पादकता की बढ़ोतरी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की बुनियाद है।


यह सुरंग इस बात का सबूत है कि अगर नीति स्पष्ट हो और इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो भारत किसी भी तकनीकी चुनौती को पार कर सकता है। बार बार अड़ंगे, मुकदमे और शोर शराबे के बावजूद काम आगे बढ़ा है। यही वह बात है जो इस परियोजना को खास बनाती है। विकास कभी शोर में नहीं, बल्कि काम में दिखाई देता है।


अब सरकार के सामने असली परीक्षा है। परियोजना समय पर पूरी हो, लागत नियंत्रण में रहे और इसके फायदे आम आदमी तक पहुंचें। यदि ऐसा हुआ, तो पालघर की यह सुरंग सिर्फ पहाड़ के आर पार का रास्ता नहीं होगी, बल्कि यह उस सोच का रास्ता बनेगी जिसमें भारत बड़े फैसले लेने से डरता नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने का साहस रखता है। बुलेट ट्रेन का यह ब्रेकथ्रू दरअसल भारत के आत्मविश्वास का ब्रेकथ्रू है।

प्रमुख खबरें

AFCON 2025 में शर्मनाक हार, गैबॉन सरकार का बड़ा ऐक्शन, पूरी फुटबॉल टीम सस्पेंड

Ashes Series के बीच उस्मान ख़्वाजा का बड़ा ऐलान, सिडनी टेस्ट के बाद लेंगे Retirement

भीषण सर्दी में भी अडिग है देश की सुरक्षा, राजधानी से लेकर सीमाओं तक जवानों का हौसला कायम

Jammu-Kashmir में Cricketer Furqan Bhat ने मैच के दौरान Helmet पर लगाया Palestine Flag, पुलिस जाँच शुरू