Prabhasakshi NewsRoom: Gaddafi जैसा ही हुआ उसके बेटे Saif al-Islam का अंत, Libya की सियासत में तूफान

By Neeraj Kumar Dubey | Feb 05, 2026

जिस तरह कभी मुअम्मर गद्दाफी का अंत हिंसा और अफरातफरी के बीच हुआ था, लगभग वैसा ही हश्र अब उसके बेटे सैफ अल इस्लाम गद्दाफी का भी हुआ। गद्दाफी परिवार का यह आखिरी बड़ा सियासी चेहरा भी मारा गया। सैफ अल इस्लाम गद्दाफी के कार्यालय के अनुसार चार हथियारबंद लोग उनके घर में घुस आए और सीधी भिड़ंत में उनकी जान चली गई। घटना के कारणों पर अब तक परदा है, लेकिन इतना साफ है कि लीबिया की सियासत ने गद्दाफी खानदान को एक बार फिर खून और संघर्ष के उसी दायरे में ला खड़ा किया है, जिससे देश पिछले डेढ़ दशक से निकल नहीं पाया है। घटना कैसे और किन हालात में हुई, इस पर चुप्पी रखी गई है, जिससे तरह तरह की अटकलें उठ रही हैं। 53 वर्ष के सैफ अल इस्लाम लंबे समय से लीबिया की राजनीति का अहम चेहरा माने जाते रहे थे, इसलिए उनकी मौत को बड़े सियासी झटके के रूप में देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एक वकील ने कहा कि यह सुनियोजित हत्या थी और घटना पश्चिमी लीबिया के जिंतान नगर में उनके निवास पर हुई। उनके परिवार के एक सदस्य ने यह भी कहा कि उनकी मौत देश की पश्चिमी सीमा के पास हुई। इन अलग-अलग दावों ने रहस्य और गहरा कर दिया है।


हम आपको बता दें कि सैफ अल इस्लाम कई वर्षों तक बिना किसी सरकारी पद के भी लीबिया की राजनीति का शक्तिशाली चेहरा रहे। वह अपने पिता के चार दशक लंबे शासन के दौरान नीति निर्माण और बाहरी देशों से बातचीत में अहम कड़ी थे। लंदन के अर्थशास्त्र विद्यालय में शिक्षा पाने और अंग्रेजी पर पकड़ रखने के कारण वह पश्चिमी राजधानियों में स्वीकार्य चेहरा माने गए। उन्होंने महाविनाश हथियार कार्यक्रम को त्यागने के निर्णय में भूमिका निभाई और उड़ान संख्या 103 विस्फोट के पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा समझौते में भी भाग लिया। वह संविधान, राजनीतिक सुधार और मानवाधिकार सम्मान की बात करते थे ताकि प्रतिबंध और अलगाव के बाद लीबिया को फिर से विश्व समुदाय में स्थान मिले।

इसे भी पढ़ें: सर्विलांस कैमरों को किया बंद, फिर बंदूकधारियों ने मारी गोली, लीबिया के पूर्व शासक गद्दाफी के बेटे सईफ अल-इस्लाम की हत्या

पर यह छवि 2011 के जनउभार में टूट गई। पिता के खिलाफ उठे विद्रोह के समय सैफ अल इस्लाम खुल कर शासन के साथ खड़े हुए। उन्होंने विद्रोहियों के खिलाफ कठोर शब्द बोले और चेताया कि खून की नदियां बहेंगी, शासन आखिरी आदमी, आखिरी औरत और आखिरी गोली तक लड़ेगा। टीवी पर दिए संबोधन में उन्होंने कहा कि हर कोई सत्ता चाहता है और देश को चलाने पर सहमति बनाने में दशकों लग सकते हैं। उनके ये बयान बाद के घटनाक्रम में सच जैसे लगे, जब देश कई गुटों में बंट गया।


त्रिपोली पर विद्रोहियों का कब्जा होने के बाद वह भेष बदल कर पास के देश की ओर जाने की कोशिश में धर लिए गए और जिंतान ले जाए गए। उन्होंने लगभग छह वर्ष हिरासत में बिताए। मानवाधिकार समूहों ने उनके लंबे एकांत पर चिंता जताई, हालांकि शारीरिक यातना का आरोप नहीं लगा। 2015 में त्रिपोली की अदालत ने युद्ध अपराध में उनको मृत्युदंड सुनाया और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने हत्या तथा उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तारी आदेश जारी किया।


2017 में क्षमादान कानून के तहत रिहाई के बाद वह लंबे समय तक भूमिगत रहे थे। 2021 में परंपरागत लीबियाई परिधान में प्रकट होकर उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवारी भरी और पिता के समय की स्थिरता की याद को सहारा बनाया। उनकी उम्मीदवारी ने समाज को बांटा, सजा के कारण उन्हें अयोग्य ठहराया गया और अपील की राह भी सशस्त्र गुटों ने रोकी। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया ठप पड़ी और देश फिर गतिरोध में फंस गया। विश्लेषकों का कहना है कि सार्वजनिक सक्रियता कम होने पर भी उनका प्रतीकात्मक महत्व बना रहा। अब उनकी हत्या से समर्थक गुटों का मनोबल घटेगा और क्रोध बढ़ेगा, साथ ही चुनाव में एक बड़ी बाधा हट गई है।


हम आपको याद दिला दें कि लीबिया में गद्दाफी का शासन चार दशकों तक रहा था। वह साठ के दशक में सत्ता में आए और अपने आप को “जनता का नेता” कहते हुए पुरानी संस्थाओं को खत्म कर दिया। सत्ता का हर फैसला उनके हाथ में केंद्रित रहा और राजनीतिक विरोध का दम घोंटा गया। 2011 में जब अरब क्रांति की लहर लीबिया तक पहुंची तो जनता की बड़ी भागीदारी के बावजूद सैफ सहित शासन के संरक्षणकर्ताओं ने विद्रोह को खून से दबाने की कोशिश की, जिससे देश में गहरी गृहयुद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई थी। अंततः विदेशी हस्तक्षेप और विद्रोहियों की बढ़त के बीच मुअम्मर गद्दाफी मारे गये उनका शासन ढह गया था।


गद्दाफी शासन के पतन के बाद से लीबिया किसी स्थिर सरकार को स्थापित नहीं कर पाया। देश में सत्ता विभाजित है और दो मुख्य विरोधी केंद्र सक्रिय हैं। एक केंद्र राजधानी त्रिपोली में स्थापित राष्ट्रीय एकता सरकार है जिसे संयुक्त राष्ट्र मान्यता देता है और दूसरा पूर्वी लीबिया में शक्तिशाली सशस्त्र नेता के नियंत्रण वाला क्षेत्र है। इन दोनों के बीच तालमेल नहीं हो पाया और राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत चुनाव असमय रुक गए हैं, जिससे लीबिया आज भी आधिकारिक रूप से संक्रमण काल से बाहर नहीं निकला है। लीबिया की संसद, प्रधानमंत्री परिषद और विभिन्न सशस्त्र गुट सत्ता के लिए लगातार भिड़ते रहते हैं और हिंसा तथा भ्रष्टाचार की समस्याएं वहां पर व्यापक रूप से देखने को मिलती हैं।


बहरहाल, सैफ अल इस्लाम गद्दाफी की हत्या दर्शाती है कि जिस देश को तेल संपदा ने समृद्ध किया उसे सत्ता संघर्ष ने खोखला कर दिया। लीबिया चूंकि उत्तर अफ्रीका, भूमध्य सागर और सहारा मार्ग के बीच स्थित है इसलिए यहां की अस्थिरता प्रवासन, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को सीधे प्रभावित करती है। सामरिक दृष्टि से यह क्षेत्र कई शक्तियों की रुचि का केंद्र है, इसलिए हर हलचल दूर तक असर डालती है। देखना होगा कि वहां अब आगे क्या होता है।

All the updates here:

प्रमुख खबरें

आखिर घाटे वाले विदेश व्यापार को मुनाफे वाले कारोबार में कब और कैसे बदलेगा भारत?

Karnataka Assembly में VB-G RAM G पर संग्राम, Congress ने नए Act के खिलाफ पारित किया प्रस्ताव

Lok Sabha में हंगामे के बीच धन्यवाद प्रस्ताव पास, विपक्ष के शोर में PM Modi नहीं दे पाए जवाब

भारत-अमेरिका व्यापार समझौताः मोदी नेतृत्व की वैश्विक दृढ़ता