इतिहास के पन्नों में आज भी नजर आते हैं मंगल पांडे

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Apr 08, 2019

भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मंगल पांडे ने आज के दिन अपने जीवन का बलिदान कर एक ऐसी क्रांति का आगाज किया जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी की चूलें हिला डालीं। मंगल पांडे एक ऐसे वीर योद्धा थे जिन्होंने भारत में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का शंखनाद किया। मंगल पांडे कोलकाता के पास बैरकपुर की सैनिक छावनी में 34वीं बंगाल नेटिव इन्फ्रैंटी के सिपाही थे। मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को रविवार के दिन अंग्रेज अफसरों पर हमला कर औपनिवेशिक शासन के खिलाफ अपने विद्रोह का बिगुल फूंका।

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मंगल पांडे के विद्रोह को देखते हुए अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया और उनका कोर्ट मार्शल किया गया। छह अप्रैल के दिन कोर्ट मार्शल का फैसला सुनाया गया जिसमें कहा गया कि 18 अप्रैल के दिन मंगल पांडे को फांसी दे दी जायेगी। उन्होंने बताया कि अंग्रेजों ने यह महसूस किया कि यदि फांसी देने में देर की गई तो और भी सैनिक बगावत में शामिल हो सकते हैं इसलिए आठ अप्रैल को ही गुपचुप तरीके से मंगल पांडे को फांसी दे दी गई।

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मंगल पांडे की शहादत आगे चलकर क्रांति का प्रतीक बन गई। हालांकि मंगल पांडे के विद्रोह के बाद नेटिव इन्फ्रैंटी भंग कर दी गई लेकिन विद्रोह की चिंगारियां आगे की इंफ्रैटी में भी फैल गईं। इसके अलावा बीसवीं सदी में आजादी की लड़ाई का सूत्रपात हुआ तो मंगल पांडे जैसे वीर योद्धाओं से लोगों ने प्रेरणा हासिल की।

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