By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 21, 2020
मुंबई। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रिजर्व बैंक अपनी दर कटौती चक्र के अंतिम छोर के करीब है, क्योंकि मुद्रास्फीति में मौजूदा स्तर से बहुत अधिक कमी आने की उम्मीद कम है। अर्थशास्त्रियों ने शुक्रवार को कहा ऐसे में अब अर्थव्यवस्था के पुनरोद्धार का दायित्व सरकार के पाले में पहुंच गया है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक समीक्षा बैठक का ब्योरा सामने आने के एक दिन बाद एसबीआई के अर्थशास्त्रियों की यह टिप्पणी आई है। बैठक के ब्योरे के अनुसार यह साफ हो गया है कि मौद्रिक समीक्षा की पिछली बैठक में ब्याज दरों को यथावत रखने की मुख्य वजह ऊंची मुद्रास्फीति थी। इस साल मार्च में कोरोना वायरस महामारी शुरू होने के बाद रिजर्व बैंक दो बार में नीतिगत दर में 1.15 प्रतिशत की कटौती कर चुका है, जिससे आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहन दिया जा सके। हालांकि, रिजर्व बैंक ने अगस्त में नीतिगत दर में कोई कटौती नहीं की। जिससे कइयों को हैरानी हुई। एसबीआई इकनॉमिस्ट के अनुसार,‘यदि हम अर्थव्यवस्था में तेजी से पुनरोद्धार की कोई उम्मीद करते हैं, तो इसे राजकोषीय नीति की भूमिका निर्णायक होगी।’’