By अभिनय आकाश | Jul 10, 2026
मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका की ओर से ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर किए गए ताजा सैन्य हमलों ने ना सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है बल्कि भारत और चीन जैसे देशों के आर्थिक और रणनीतिक हितों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी हमलों में ईरान के चाबाहार पोर्ट के शाहिद बेहती टर्मिनल और चीन ईरान रेल कॉरिडोर से जुड़े एक महत्वपूर्ण रेलवे पुल को नुकसान पहुंचा है। अगर इस बुनियादी ढांचों पर असर लंबे समय तक बना रहता है तो इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी पर भी पड़ सकता है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार अमेरिकी मिसाइल हमलों में चाबाहार स्थित शाहिद बहष्ठी फोर्ट टर्मिनल के कई हिस्से प्रभावित हुए हैं।
इसी मार्ग का इस्तेमाल रूस के साथ माल डुलाई के लिए भी किया जाता है। खासकर उन परिस्थितियों में जब समुद्री मार्गों पर दबाव पड़ता है। रिपोर्टर के अनुसार हमले के बाद तेहरान और मशहद के बीच कुछ रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई। ईरान के रेलवे एजेंसियों ने मरम्मत कार्य शुरू करने का दावा किया और यात्रियों के लिए वैकल्पिक सड़क परिवहन की व्यवस्था किए जाने की बात कही है। अधिकारियों का कहना है कि क्षतिग्रस्त रेल मार्ग को जल्द बहाल करने की कोशिश की जा रही है। इन घटनाओं ने एक बार फिर दिखा दिया कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता सैन्य तनाव सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहता बल्कि उसका असर वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक परियोजनाओं पर भी पड़ता है। भारत के चाबार पोर्ट केवल एक बंदरगाह नहीं बल्कि मिडिल ईस्ट तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण द्वार है। वहीं चीन के लिए ईरान उसके बेल्ट एंड रोड नेटवर्क का क्षेत्रीय व्यापारिक संपर्क का अहम साझेदार है। अगर क्षेत्र में सैन्य कारवाही और बढ़ती है तो इसका असर कच्चे तेल की कीमतों, समुद्री व्यापार मार्गों और वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है। ऐसे में दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या यह तनाव सीमित रहेगा या फिर मिडिल ईस्ट में एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका और गहरा जाएगी। इधर ईरान के सुप्रीम लीडर रहे सैयद आयतुल्लाह अली खामने का जनाजा नजफ से कर्बला होते हुए ईरान के मशहद पहुंच गया है और वहां सुपुरदे खाक किए जाने की तैयारी है।