सदियों पुराना है भारत में योग का इतिहास

By योगेश कुमार गोयल | Jun 20, 2025

दुनियाभर के 170 से भी ज्यादा देश प्रतिवर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाते हैं और योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लेते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखे गए प्रस्ताव के जवाब में 11 दिसंबर 2014 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की स्थापना की थी और वैश्विक स्तर पर पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया था। इस वर्ष पूरी दुनिया ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य के लिए योग’ थीम के साथ 11वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। प्रतिवर्ष यह दिवस मनाने का उद्देश्य योग को एक ऐसे आंदोलन के रूप में बढ़ावा देना है, जो व्यक्ति की तन्यकता को उन्नत करता है और समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए कल्याण को बढ़ावा देता है। वैसे तो योग को विश्व स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सतत प्रयासों के चलते वर्ष 2015 में अपनाया गया था किंतु भारत में योग का इतिहास सदियों पुराना है। माना जाता रहा है कि पृथ्वी पर सभ्यता की शुरुआत से ही योग किया जा रहा है लेकिन साक्ष्यों की बात करें तो योग करीब पांच हजार वर्ष पुरानी भारतीय परंपरा है। करीब 2700 ईसा पूर्व वैदिक काल में और उसके बाद पतंजलि काल तक योग की मौजूदगी के ऐतिहासिक प्रमाण मिलते हैं।

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योग न केवल कई गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित होता है बल्कि मानसिक तनाव को खत्म कर आत्मिक शांति भी प्रदान करता है। दरअसल यह एक ऐसी साधना, ऐसी दवा है, जो बिना किसी लागत के शारीरिक एवं मानसिक बीमारियों का इलाज करने में सक्षम है। यह मस्तिष्क की सक्रियता बढ़ाकर दिनभर शरीर को ऊर्जावान बनाए रखता है। यही कारण है कि अब युवा एरोबिक्स व जिम छोड़कर योग अपनाने लगे हैं। माना गया है कि योग तथा प्राणायाम से जीवनभर दवाओं से भी ठीक न होने मधुमेह रोग का भी इलाज संभव है। यह वजन घटाने में भी सहायक माना गया है। योग की इन्हीं महत्ताओं को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा से आह्वान किया था कि दुनियाभर में प्रतिवर्ष योग दिवस मनाया जाए ताकि प्रकृति प्रदत्त भारत की इस अमूल्य पद्धति का लाभ पूरी दुनिया उठा सके। यह भारत के बेहद गर्व भरी उपलब्धि रही कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री के इस प्रस्ताव के महज तीन माह के भीतर 177 देशों ने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाए जाने के प्रस्ताव पर स्वीकृति की मोहर लगा दी, जिसके उपरांत संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 11 दिसम्बर 2014 को घोषणा कर दी गई कि प्रतिवर्ष 21 जून का दिन दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए 21 जून का ही दिन निर्धारित किए जाने की भी खास वजह रही। दरअसल यह दिन उत्तरी गोलार्ध का पूरे कैलेंडर वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है। इस दिन की तिथि को ग्रीष्म संक्रांति के साथ मेल खाने के लिए बनाया गया था, जो उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है और प्रकाश और स्वास्थ्य का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति के नजरिये से देखें तो ग्रीष्म संक्रांति के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाता है तथा यह समय आध्यात्मिक सिद्धियां प्राप्त करने में लाभकारी माना गया है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी योग के महत्व को स्वीकारने लगा है। इसलिए स्वस्थ जीवन जीने के लिए जरूरी है कि योग को अपनी दिनचर्या का अटूट हिस्सा बनाया जाए। बहरहाल, योग केवल एक व्यायाम नहीं है बल्कि यह शरीर और मन के साथ-साथ स्वयं को सशक्त बनाने का एक बेहतरीन तरीका है।

- योगेश कुमार गोयल

(लेखक 35 वर्षों से पत्रकारिता में निरन्तर सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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