RSS Role in Bengal Election | बंगाल में 'कमल' खिलने के पीछे RSS की मौन साधना: 2 लाख बैठकें और 'निर्भीक मतदान' का वह अभियान जिसने पलट दी बाजी

By रेनू तिवारी | May 04, 2026

पश्चिम बंगाल के चुनावी इतिहास में साल 2026 एक बड़े राजनीतिक उलटफेर के गवाह के रूप में दर्ज हो रहा है। ममता बनर्जी के 15 साल पुराने 'तृणमूल किले' में सेंध लगाने में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जो सफलता मिलती दिख रही है, उसके पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवकों की वर्षों की कड़ी मेहनत और रणनीतिक कौशल का बड़ा हाथ है। रात 8 बजे तक के रुझानों और नतीजों के अनुसार, भाजपा 294 सदस्यीय विधानसभा में 107 सीटें जीत चुकी है और 99 पर बढ़त बनाए हुए है। इस बड़ी जीत को सुनिश्चित करने के लिए RSS ने चुनाव से महीनों पहले एक व्यापक और सूक्ष्म अभियान छेड़ा था।

सूत्रों के अनुसार, आरएसएस के स्वयंसेवकों ने जमीनी स्तर पर लोगों की नब्ज़ पर भी नजर रखी और भाजपा को ‘‘जनता के मिजाज’’ और ‘‘प्रतिद्वंद्वियों की चाल’’ के बारे में ‘‘महत्वपूर्ण जानकारी’’ दी, जिससे पार्टी को अपनी चुनावी रणनीति को बेहतर बनाने में मदद मिली। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का किला ढहाने में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिली सफलता में आरएसएस स्वयंसेवकों के योगदान को स्वीकार करते हुए एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘उन्होंने वास्तव में बहुत मेहनत की।’’

मतगणना अभी भी जारी है, लेकिन ताजा रुझानों से संकेत मिल रहा है कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल को काफी पीछे छोड़ दिया है, क्योंकि पार्टी (भाजपा) ने रात के करीब आठ बजे तक 294 सदस्यीय विधानसभा में 107 सीटों पर जीत हासिल कर ली है और 99 पर बढ़त बनाए हुए है। सूत्रों ने कहा,‘‘हमने जमीनी स्तर पर दिन-रात काम किया और लोगों तक अपना संदेश पहुंचाया। भाजपा ने भी इस सफलता को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की।’’

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उन्होंने बताया कि पार्टी और संघ के स्वयंसेवकों ने हर स्तर पर उपयुक्त समन्वय के साथ काम किया। सूत्रों के अनुसार, चुनावों के दौरान, आरएसएस स्वयंसेवकों ने बड़े पैमाने पर मतदाता जागरूकता अभियान चलाए और राज्य भर में लोगों के छोटे समूहों के साथ लगभग दो लाख बैठकें कीं। एक सूत्र ने बताया, ‘‘इन बैठकों के दौरान, लोगों को चुनाव से जुड़े मुद्दों से अवगत कराया गया और निर्भीक होकर मतदान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। उन्हें उनकी सुरक्षा का आश्वासन दिया गया।’’ सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद अपना जनाधार मजबूत करते हुए उसका विस्तार करना शुरू कर दिया, जिसमें पार्टी मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी और 2016 की तीन सीटों से बढ़कर 77 सीटें जीत लीं। आरएसएस ने भी राज्य में 2021 के विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद भाजपा के अगले चुनावी अभियान के लिए जमीन तैयार करनी शुरू कर दी थी।

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संघ के एक अन्य सूत्र ने कहा, ‘‘2021 में तृणमूल की जीत के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा में कई (भाजपा) कार्यकर्ता मारे गए। लेकिन हम रुके नहीं। हमने अपना काम जारी रखा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम चुनाव बाद की हिंसा के पीड़ितों के साथ खड़े रहे और उन्हें राहत दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया। हमने उन्हें कानूनी सलाह, मुआवजा और उनके घरों के पुनर्निर्माण में मदद की, जिन्हें चुनाव बाद हुई हिंसा में आग के हवाले कर दिया गया था या क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। हमने उनकी आजीविका का भी ध्यान रखा।

News Source- Press Trust OF India 

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