By अंकित सिंह | Jun 05, 2026
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। विदेशी पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बावजूद निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा। आर्थिक विकास और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों को लेकर बनी चिंताओं का बाजारों पर दबाव बना रहा। बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंक या 0.16 प्रतिशत गिरकर 74,243.34 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 49.85 अंक या 0.21 प्रतिशत गिरकर 23,366.70 पर बंद हुआ।
सरकार द्वारा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को कर राहत प्रदान करने वाले अध्यादेश जारी करने के बाद बाजार सकारात्मक शुरुआत के साथ खुले। उम्मीद थी कि इस कदम से विदेशी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और रुपये को मजबूती मिलेगी। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक के मौद्रिक नीति संबंधी फैसले और संशोधित आर्थिक विकास के अनुमानों पर निवेशकों की प्रतिक्रिया के कारण यह बढ़त अल्पकालिक रही।
आरबीआई ने वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक जोखिमों का हवाला देते हुए बेंचमार्क रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा और जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया। वैश्विक घटनाक्रमों ने भी निवेशकों को चिंतित रखा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, इज़राइल-लेबनान युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने की चिंताओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और मुद्रास्फीति के जोखिमों को लेकर आशंकाएं बढ़ा दीं।