उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब गर्माया आतंकवाद का मुददा

By मृत्युंजय दीक्षित | Feb 23, 2022

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के तीन चरणों का मतदान संपन्न हो चुका है और प्रदेश में सभी राजनैतिक दलों ने आगामी चार चरणों के लिए चुनाव प्रचार का अभियान और तेज कर दिया है। अभी तक सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी की ओर से सुरक्षा और विकास के साथ पिछली सरकारों की बदहाल कानून व्यवस्था को मुददा बनाकर बढत बना ली गयी थी लेकिन अब 14 वर्ष पूर्व अहमदाबाद में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 38 दोषियों को मृत्युदंड और 11 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद प्रदेशके चुनावों में आतंकवाद का मुददा गर्मा गया है।

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अहमदाबाद धमाके पर फैसला अने के बाद से ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समाजवादी पार्टी पर हमलावर हो गये थे भापजा नेता अनुराग ठाकुर ने एक आतंकी के पिता की फोटो समाचार पत्रों में साझा करते हुए कहाकि अहमदाबाद बम धमाकों के तार सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के साथ जुडे हुए हैं। अखिलेश यादव मौन हैं, कारण क्या है। क्या है यह कनेक्शन आजमगढ़ को आतंकवाद का गढ़ बनाने का और ये भी नही बता पा रहे हैं कि आतंकवादियां पर चुप्पी साधने का कनेक्शन आखिर क्या है ?

आतंकी हमलों के प्रति सपा पर जो आरोप लगाय गये है वह सभी पूरी तरह से सत्य हैं। अखिलेश यादव सरकार के दौरान 2013 में सात जिलों में आतंकी हमलों से जुड़े 14 केस एक साथ वापस लिये गये थे। अखिलेश सरकार ने जिन 14 मामलों को वापस लिया था उनमें लखनऊ के छह और कानपुर के तीन मामले थे। इसके अलावा वाराणसी, गोरखपुर, बिजनौर, रामपुर और बाराबंकी का एक मामला था। अखिलेश सरकार ने पांच मार्च 2013 को संकट मोचन मंदिर एवं रेलवे स्टेशन कैंट पर धमाको में शामिल आतंकियों का भी मुकदमा भी सपा सरकार ने वापस लिया था। एक प्रेशर कुकर में घड़ी लगाकर विस्फोटक दशाश्वमेघघाट पर भी मिला था। इस आतंकी हमले में 28 लोगों की मौत हुई थी ओर 101 से अधिक लोग घायल हो गये थे।

इसी तरह 20 मई 2007 को गोरखपुर के बलदेव प्लाजा जरकल बिल्डिंग और गणेश चौराहा हुए सिसलसिलेवार विस्फेट के मामले को राज्य सरकार ने वापस ले लिया था। वैसे अदालत ने सरकार के आदेश को मानने से इंकार कर दिया था और बाद में दोषियों को 20 साल की सश्रम कारावास की सजा हुयी थी। वहीं कई मामलों में सरकार के फैसले को मानते हुए केस को समाप्त कर दिय गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाजवादी पार्टी के तार आतंकियां के साथ जोड़कर बिल्कुल सही काम किया है क्योंकि सपा हमेशा से ही सेकुलरवाद के नाम पर आतंकियों के प्रति बेहद नरम रवैया अपनाती रही है। 2012 के चुनाव घोषणापत्र में भी समाजवादियां ने मुस्लिम समाज से वादा किया था कि वह देश की जेलों में बंद निर्दोष युवाओं की रिहाई अवश्य करवायेंगे। सपा यह कहती रहती है कि आतंक के नाम पर मुसलमानों को बदनाम किया जा रहा है और फर्जी गिरफ्तारी से लेकर उनका फर्जी एनकाउंटर तक किया जा रहा है। समाजवादी पार्टी का रवैया आतंकवाद व आतंकवादियों के लिए सदा उदार रहा है।

समाजवादी पार्टी तो लव जेहाद और धर्मांतरण के मुददों पर भी मुस्लिम कटटरपिंथयो का साथ देती रही है। सपा सरकार में तो गौवध और गौ तस्करी चरम सीमा पर थी। आज यही लोग निराश्रित पशुओं का मुददा तो उठा रहे हैं लेकिन यह वही सपा है जिसकी सरकारों में गांवों में लोगों के पशु चोरी हो जाते थे। आज कम से कम गांवों में लोगों के पशु चोरी नहीं हो रहे हैं। समाजवादी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में ही अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि को भी निशाना बनाया गया था। यह तो भला हो उस समय तत्कालीन हाईकोर्ट के जजों का जिनके कारण आतंकवादी छूट नहीं पाये और सपा का पाप आगे नहीं बढ़ पाया था। आतंकवाद को समर्थन के नाम पर समाजवादी पार्टी का तो काला इतिहास भरा पड़ा है और यही कारण है कि अहमदाबाद बम धमाकों में फैसला आ जाने के बाद समाजवादी बैकफुट पर चले गये हैं।

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जब अहमदाबाद बम धमाकों में आरोपियों को पकड़ा जा रहा था उस समय भी खूब राजनीति हुई थीं और सपा सहित सभी सेकुलर दलों ने भाजपा व एजेंसियों पर आजमगढ़ व मुस्लिम समाज को बदनाम करने के आरोप भी लगाये थे।

यह सपा नई नयी है अपितु यह पुरानी सपा है और यह अब और अधिक खतरनाक हो चुकी है। अहमदाबाद बम धमाका मामले में फैसले को जमीयत उलेमा-ए-हिंद के नेता मौलना अरशद मदनी ने अविश्वसनीय बताते हुए हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक जाने की बात कही है वहीं मदनी का बयान आने के बाद प्रदेश बीजेपी के एक नेता का बयान वायरल हो रहा है कि इस पूरे मामले में मदनी की भूमिका की भी जांच होनी चहिए। मदनी का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें संगठन के कार्यक्रम में उनके साथ सपा नेता अखिलेश यादव, रालोद नेता जयंत चौधरी और आप नेता अरविंद केजरीवाल भी खड़े दिखलायी पड़ रहे हैं। यह वही नेता हैं जो मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर राष्ट्रीय सुरक्षा तक को दांव पर लगा देते हैं। यह वहीं नेता हैं जो कश्मीर के पुलवामा हमले की साजिश रचने का आरोप उल्टा भारत सरकार पर ही लगा देते हैं और सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के सबूत मांगते हैं, यह वहीं नेता हैं जो जनरल विपिन रावत को सडक का गुंडा तक कहते रहे हैं। कांग्रेस के नेता खूंखार आतंकी ओसामा बिन लादेन को अभी भी ओसामा जी कहकर बुला रहे हैं।

2019 के लोकसभा चुनावो में सपा नेता रामगोपाल यादव ने पुलवामा हमलों को लेकर मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर एक बहुत ही गंदा बयान दिया था और फिर एयर स्ट्राइक पर सरकार से सबूत भी मांगे थे । समाजवादी दल हमेशा आतंकवाद व आतंकवादियों का समर्थक रहा है। यही कारण है कि आज जहां एक फांसी की सजा पाया एक आरोपी का पिता समाजवादी दल का प्रचार कर रहा है वहीं दूसरी ओर नाहिद हसन, मुख्तार अंसारी, अतिक अहमद और आजम खान जैसे लोग उनके यहां संरक्षण पाकर फल फूल रहे हैं।

हरदोई की जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सपा कार्यकाल के सभी राज खोल दिये है। तथा अहमदाबाद बम धमाकों में सपा को जोड़कर सपा को तो सन्न कर दिया है वही सभी सेकुलर दलों का भी असली रंग जनमानस के सामने खोलकर रख दिया है। आतंकवाद के मुददे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय था जब कि देश में बड़े धमाके होते थे। उन्होंने सपा पर आतंकवाद को बढावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यूपी में 2006 में काशी में धमाका हुआ संकटमोचन मंदिर में भी धमाका हुआ लेकिन तब सपा सरकार ने आरोपी शमीम अहमद पर मुकदमे को वापस लिया था। गोरखपुर आतंकी हमले में शामिल तारिक से भी सपा सरकार ने केस वापस लिया था। आज भी सपा का रवैया कतई नहीं बदला है और वह अपने ऊपर लग रहे आरोपों का खंडन नहीं कर पा रही है अपितु वह सोशल मीडिया पर साइकिल का अपमान करने का आरोप लगा रही है। अब यह तो हो गया है कि आगामी चरणों में आतंकवाद का मुददा हावी रहेगा और इस मुददे पर समाजवादी दल सहित सेकुलर दल बैकफुट पर आ गये हैं।

- मृत्युंजय दीक्षित

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