By दिव्यांशी भदौरिया | Jul 15, 2026
आजकल लोग ऑफिस मीटिंग में स्ट्रेस के बाद या एग्जाम की टेंशन होने पर भूख लगने लगती है। असल में तनाव के दौरान खाने की इच्छा अधिक हो जाती है और बार-बार भूख लगना स्ट्रेस ईटिंग या इमोशनल ईटिंग का संकेत हो सकता है। इसी कारण से आज के समय में तनाव में रहने वाले लोग मोटापे की समस्या से अधिक परेशान है।
क्या होती है स्ट्रेस ईटिंग
हार्वर्ड हेल्थ के मुताबिक, तनाव के समय शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भूख को प्रभावित करते हैं। जब कॉर्टिसोल का लेवल अधिक बढ़ने लगता है, तो हाई-कैलीरी फूड खाने की इच्छा बढ़ सकती है। वैसे यह शरीर की एक जैविक प्रतिक्रिया है, जो लंबे समय तक रहने पर नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए कहा जा सकता है कि क्रॉनिक स्ट्रेस भूख और खाने की आदतों को बदल सकता है।
स्ट्रेस ईटिंग के किन लक्षणों से इसे पहचानने में मदद मिल सकती है?
अचानक खाने की इच्छा होना
एक अध्ययन से पता चला है कि, आपने हाल ही में खाना खाया है और आपको तनाव या चिंता महसूस होते ही कुछ खाने की इच्छा होने लगती है, तो यह स्ट्रेस इटिंग का संकेत हो सकता है। भावनात्मक तनाव मस्तिष्क के रिवार्ड सिस्टम को प्रभावित कर सकता है, जिससे व्यक्ति भोजन के जरिए राहत तलाशने लगता है।
अत्यधिक वसा और मीठा खाने का मन करना
हार्वर्ड हेल्थ के अनुसार, स्ट्रेस ईटिंग के समय व्यक्ति के खाने की इच्छा में काफी बदलाव देखने को मिलता है। स्ट्रेस होने पर व्यक्ति सलाद या हेल्दी फूड की जगह पर मीठा या अनहैल्दी फैट युक्त चीजें खाना पसंद करते हैं।
स्ट्रेस ईटिंग से कैसे बचाव करें?
- आप सोच-समझकर ही भोजन करें। कहीं आपको स्ट्रेस के कारण भूख नहीं लगती है। इसलिए कुछ समय रुककर विचार करें कि क्या आपको वाकई खाने की जरुरत है या नहीं।
- अगर आप भी कुछ खाने की इच्छा रखते हैं, तो चिप्स, कुकीज और मिठाइयों की जगह फल, मेवे, दही या भुने चने जैसे ऑप्शन चुन सकते हैं।
- जब भी आप भोजन करें तो विचार करें कि क्या आपको किसी बात पर बुरा लगने के बाद इस तरह की इच्छा महसूस होती है। ऐसे में अपने ट्रिगर को पहचाने और उससे दूरी बनाएं या डॉक्टर को एक बार जरुर दिखाएं।
- योग, मेडिटेशन और एक्सरसाइज ब्रेन में ब्लड फ्लो को बढ़ाने में मदद करती है। इससे स्ट्रेस कम होने में मदद मिलती है और आप नई चीजों को सोचने में ध्यान लगाएं।