By नीरज कुमार दुबे | May 09, 2026
अमेरिका का प्रमुख समाचार-पत्र वाशिंगटन पोस्ट वैसे तो अक्सर भारत विरोधी लेख ही प्रकाशित करता है लेकिन अब उसने एक दुर्लभ उदाहरण प्रस्तुत करते हुए भारत के बारे में सकारात्मक लेख प्रकाशित किया है। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण ने भारत की राजनीति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी की लगातार बढ़ती ताकत को लेकर दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। लंबे समय से पश्चिमी उदारवादी विचारधारा से जुड़े विश्लेषकों और भारत के विपक्षी दलों का मानना रहा कि भारत जैसी अत्यंत विविधतापूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी मजबूत नेतृत्व वाली राजनीति की सीमाएं होंगी और अंततः ऐसी राजनीति का प्रभाव कमजोर पड़ जाएगा। लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने इस धारणा को गहरी चुनौती दी है।
विश्लेषण में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल की नेता ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को लंबे समय तक भारतीय जनता पार्टी के विस्तार के सामने मजबूत दीवार माना जाता था। यह धारणा भी मजबूत थी कि भारत की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता किसी एक राजनीतिक दल को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वस्वीकार्य बनने से रोकेगी। किंतु पश्चिम बंगाल में मिली सफलता ने यह संकेत दिया कि भारतीय जनता पार्टी अब उन क्षेत्रीय और सांस्कृतिक बाधाओं को भी पार कर रही है जिन्हें कभी उसके विस्तार की सीमा माना जाता था।
लेख में भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक विस्तार को भी असाधारण बताया गया है। पार्टी की सदस्य संख्या को दुनिया में किसी भी राजनीतिक दल से अधिक बताया गया है। विश्लेषण के अनुसार पार्टी के लगभग चौदह करोड़ सदस्य हैं, जो चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से भी अधिक हैं। इसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मानव इतिहास में सबसे अधिक जनसमर्थन पाने वाले नेताओं में गिना गया है। विभिन्न वैश्विक सर्वेक्षणों में भी उनकी लोकप्रियता लंबे समय से शीर्ष पर बनी हुई है।
देखा जाये तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहचान अब केवल भारत के लोकप्रिय नेता तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वह वैश्विक राजनीति में भी एक प्रभावशाली और निर्णायक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरे हैं। दुनिया के अनेक देशों में भारत की बढ़ती साख के पीछे मोदी की सक्रिय कूटनीति, मजबूत निर्णय क्षमता और वैश्विक मंचों पर भारत की स्पष्ट उपस्थिति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास बात यह है कि ऐसे समय में जब दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश माने जाने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई बड़े वैश्विक नेताओं की लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की जा रही है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षणों और जनमत अध्ययनों में मोदी लंबे समय से दुनिया के सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेताओं में शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि भारत का नेतृत्व अब केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन और अंतरराष्ट्रीय विमर्श में भी उसकी निर्णायक भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
हम आपको यह भी बता दें कि वाशिंगटन पोस्ट में प्रकाशित लेख में आलोचनाओं का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद विश्लेषण का निष्कर्ष यह है कि केवल चुनावी प्रबंधन या संस्थागत प्रभाव के आधार पर भारतीय जनता पार्टी की सफलता को नहीं समझा जा सकता। पार्टी ने कुछ दशकों के भीतर सीमित प्रभाव वाले संगठन से देश के 21 राज्यों में सत्ता तक का सफर तय किया है। इसके विपरीत स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करने वाली कांग्रेस पार्टी अब कुछ गिने चुने राज्यों तक सीमित होती दिखाई दे रही है।
लेख में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच संगठनात्मक अंतर को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। कांग्रेस को जहां स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत और अभिजात वर्ग का समर्थन मिला, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने जमीनी स्तर पर लंबे संगठनात्मक संघर्ष के माध्यम से अपनी स्थिति मजबूत की। पार्टी ने जाति, भाषा, क्षेत्र और धार्मिक परंपराओं से परे व्यापक सामाजिक गठबंधन तैयार किया।
इस पूरे विस्तार के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। सौ वर्ष पुराने इस संगठन ने लाखों कार्यकर्ताओं और अनेक सामाजिक संगठनों के माध्यम से व्यापक वैचारिक ढांचा तैयार किया। विश्लेषण में कहा गया है कि श्रमिक संगठन, निजी विद्यालय नेटवर्क, छात्र संगठन और धार्मिक नेतृत्व से जुड़े अनेक मंचों के जरिये यह विचारधारा समाज के विभिन्न हिस्सों तक पहुंची। इसी मजबूत सामाजिक नेटवर्क, रणनीतिक गठबंधनों और संगठनात्मक अनुशासन ने भारतीय जनता पार्टी के उभार की मजबूत नींव तैयार की।
अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भी भारत की बढ़ती शक्ति को इस राजनीतिक विस्तार से जोड़ा गया है। लेख में भारत को दुनिया की सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सैन्य शक्ति और तेजी से उभरती आर्थिक ताकत बताया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि एशिया में चीन के प्रभाव का संतुलन बनाने की क्षमता यदि किसी देश में है तो वह भारत है। ऐसे समय में भारतीय जनता पार्टी का लगातार विस्तार यह संकेत देता है कि आने वाले दशकों में भारत की दिशा और एशिया की शक्ति संरचना पर इस राजनीतिक विचारधारा का गहरा प्रभाव रह सकता है।
विश्लेषण का अंतिम निष्कर्ष यही है कि भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक जिस राजनीतिक गिरावट की लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे हैं, वह फिलहाल दिखाई नहीं देती। इसके उलट वर्तमान राजनीतिक संकेत यह बताते हैं कि आने वाले वर्षों में भारत की राजनीति, उसकी वैश्विक भूमिका और एशिया का सामरिक संतुलन काफी हद तक इसी नेतृत्व और इसी राजनीतिक धारा के प्रभाव में आकार ले सकता है।
-नीरज कुमार दुबे