Shaurya Path: Indian Weapons पर बढ़ रहा दुनिया का भरोसा, Armenia भेजे गये Pinaka Rocket System

By नीरज कुमार दुबे | Jan 21, 2026

भारत के रक्षा निर्यात की कहानी में एक नया अध्याय तब जुड़ा जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नागपुर की एक इकाई से पिनाका निर्देशित रॉकेट प्रणाली की पहली खेप को रवाना किया। यह खेप ऑर्मेनिया के लिए है और इसे भारत की उभरती सामरिक क्षमता तथा वैश्विक भरोसे का ठोस संकेत माना जा रहा है। हम आपको बता दें कि बहु नली रॉकेट लांचर पिनाका अपनी सटीकता और लंबी मारक क्षमता के लिए जाना जाता है। इसके उन्नत संस्करण अब 75 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम हैं जबकि हालिया परीक्षणों में इसकी सीमा 120 किलोमीटर तक पहुंची है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि पिनाका मिसाइलों का निर्यात नागपुर स्थित सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस इकाई में विकसित स्वदेशी क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत अब केवल आयातक नहीं रहा बल्कि तेजी से निर्यातक देश बन रहा है। निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि जहां दस वर्ष पहले रक्षा निर्यात एक हजार करोड़ रुपये से भी कम था वहीं अब यह बढ़कर 24 हजार करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। इसी अवधि में घरेलू रक्षा उत्पादन 2014 के 46 हजार 425 करोड़ रुपये से बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।

हम आपको बता दें कि भारतीय थल सेना पहले ही पिनाका एमके वन एन्हांस्ड संस्करण को अपने बेड़े में शामिल कर चुकी है। यह प्रणाली मूल रूप से 37.5 किलोमीटर की मारक क्षमता के साथ विकसित हुई थी लेकिन समय के साथ इसमें लगातार सुधार हुआ। अब सेना लगभग 2500 करोड़ रुपये के प्रस्ताव के तहत 120 किलोमीटर मारक क्षमता वाले रॉकेट शामिल करने की तैयारी में है। दिसंबर 2025 में इन रॉकेटों का सफल परीक्षण किया गया और खास बात यह है कि इन्हें उसी लांचर से दागा जा सकता है जिससे अभी 40 और 75 किलोमीटर तक के लक्ष्य साधे जाते हैं।

हम आपको याद दिला दें कि सितंबर 2022 में भारत और ऑर्मेनिया के बीच लगभग 2000 करोड़ रुपये का समझौता हुआ था जिसके तहत चार पिनाका बैटरियां, टैंक रोधी रॉकेट, गोला बारूद और अन्य उपकरण शामिल थे। बिना दिशा-निर्देश वाले पिनाका रॉकेट की आपूर्ति जुलाई 2023 से शुरू होकर नवंबर 2024 तक पूरी हो चुकी है। अब निर्देशित रॉकेट की पहली खेप भेजी गई है। हम आपको बता दें कि ऑर्मेनिया पिनाका का पहला पुष्ट विदेशी खरीदार है लेकिन दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप के कई देशों ने भी इसमें गहरी रुचि दिखाई है जिनमें फ्रांस का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।

पिनाका का विकास 1980 के दशक के अंत में DRDO ने रूसी ग्राड प्रणाली के विकल्प के रूप में शुरू किया था। आज इसे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, सोलर इंडस्ट्रीज, म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड और इकनॉमिक एक्सप्लोसिव्स जैसी भारतीय इकाइयों के सहयोग से तैयार किया जा रहा है। साथ ही पिनाका के अलावा भारत अपनी स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणाली भी निर्यात के लिए पेश कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर में इसकी क्षमता सामने आने के बाद दुनिया भर में इसके प्रति रुचि बढ़ी है। हम आपको बता दें कि ऑर्मेनिया को नवंबर 2024 में 15 प्रणालियों के 720 मिलियन डॉलर के सौदे के तहत पहली बैटरी मिली थी। फिलीपींस, मिस्र और वियतनाम जैसे देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई है।

देखा जाये तो नागपुर से पिनाका राकेट की खेप का रवाना होना केवल एक कारोबारी लेन देन नहीं है बल्कि यह भारत के रणनीतिक आत्मविश्वास की घोषणा है। दशकों तक हथियार आयात पर निर्भर रहा देश अब न केवल अपनी जरूरतें स्वयं पूरी कर रहा है बल्कि दुनिया को यह भरोसा भी दिला रहा है कि भारतीय हथियार भरोसेमंद, किफायती और युद्ध में परखे हुए हैं। पिनाका और आकाश जैसे मंच इस बदलाव के प्रतीक बन चुके हैं।

हम आपको यह भी बता दें कि रक्षा क्षेत्र के लिए वर्ष 2025 को सुधारों का वर्ष कहा गया है और इसके पीछे ठोस वजहें हैं। गत साल भारत ने साइबर, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, अतितीव्र गति और रोबोटिक्स जैसे नए क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज कीं। डीआरडीओ ने लंबी दूरी की जहाज रोधी मिसाइल परियोजना के तहत हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन और ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लांचर का प्रदर्शन किया। मानवरहित प्रणालियों, पांचवीं पीढ़ी के एआई आधारित इमेजिंग सीकर, विंग इन ग्राउंड विमान और एक्सोस्केलेटन जैसी प्रणालियों ने दिखाया कि भारतीय रक्षा अनुसंधान अब भविष्य की ओर देख रहा है। आज भारत का रक्षा उत्पादन लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपये पर है जिसमें करीब 23 प्रतिशत योगदान निजी क्षेत्र का है। लगभग 16 हजार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम इस आपूर्ति शृंखला का हिस्सा हैं। यह पारिस्थितिकी तंत्र केवल रोजगार नहीं दे रहा बल्कि नवाचार को भी गति दे रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल इसका एक और उदाहरण है जिसकी मांग अब दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया तक फैल रही है।

हम आपको यह भी बता दें कि भारत विश्व के शीर्ष पांच सैन्य खर्च करने वाले देशों में शामिल है। 6.81 लाख करोड़ रुपये के बजट में से करीब 2.67 लाख करोड़ रुपये आधुनिकीकरण के लिए रखे गए हैं। यह आधुनिकीकरण स्वदेशी खरीद और आवश्यकता पड़ने पर आयात के संतुलन से हो रहा है। फ्रांस के साथ 26 रॉफेल मरीन विमानों का सौदा और अमेरिका से जैवलिन मिसाइल तथा एक्सकैलिबर प्रक्षेप्य का आयात इसी यथार्थवादी सोच को दर्शाता है।

वैसे आत्मनिर्भरता का अर्थ आत्मनिर्भर होकर दुनिया से कट जाना नहीं है। इसी सोच के तहत भारत सह विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दे रहा है। डीआरडीओ एक वैश्विक एयरोस्पेस कंपनी के साथ 120 केएन एयरो इंजन के सह विकास की तैयारी में है। परियोजना पी 751 के तहत छह पनडुब्बियों का निर्माण भी सहयोगी मॉडल पर होगा। देखा जाये तो नीतिगत स्तर पर रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया में बदलाव और डीपीएम का लागू होना निर्णय प्रक्रिया को तेज करेगा।

साथ ही मोदी सरकार विदेशी निवेश नियमों को भी सरल बनाने की दिशा में बढ़ रही है। रक्षा क्षेत्र में स्वचालित मार्ग से विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर 74 प्रतिशत करने और कुछ शर्तों को हटाने का प्रस्ताव इस बात का संकेत है कि भारत वैश्विक कंपनियों को केवल बाजार नहीं बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहता है। अब तक इस क्षेत्र में विदेशी निवेश सीमित रहा है लेकिन नीति में स्पष्टता आने से तस्वीर बदल सकती है।

आज स्वदेशी उत्पादन देश की करीब 65 प्रतिशत रक्षा जरूरतें पूरी कर रहा है जो एक दशक पहले की स्थिति से बड़ा बदलाव है। हालांकि अगली पीढ़ी के इंजन, स्टेल्थ तकनीक और रणनीतिक इलेक्ट्रानिक्स जैसे क्षेत्रों में अभी और काम बाकी है। फिर भी लागत प्रभावी और तकनीकी रूप से सक्षम प्रणालियों के कारण भारत अपने समकक्ष देशों से सीधे प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में आ चुका है। देखा जाये तो पिनाका की खेप के साथ शुरू हुई यह यात्रा केवल शुरुआत है। जैसे जैसे भारतीय हथियार वैश्विक युद्धक्षेत्रों में अपनी उपयोगिता सिद्ध करेंगे वैसे वैसे दुनिया का भरोसा और मजबूत होगा। रक्षा निर्यात केवल आर्थिक लाभ का साधन नहीं बल्कि कूटनीतिक प्रभाव और रणनीतिक साझेदारी का माध्यम भी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत का रक्षा उद्योग हर अंत को एक नई शुरुआत में बदलने की तैयारी में दिख रहा है।

-नीरज कुमार दुबे

प्रमुख खबरें

Share Market Crash: सेंसेक्स 2500 अंक टूटा, चंद घंटों में डूबे Investors के अरबों रुपये

Middle East में तनाव बढ़ा! Bahrain की Oil Refinery में भीषण आग, तेल सप्लाई पर Emergency घोषित।

Middle East में War Tension का खौफ, Dubai से Exit Plan बना रहे अमीर एशियाई परिवार।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से विमानन कंपनियों के शेयर गिरे, बाजार में बढ़ी चिंता