Pakistan Political Crisis| विधानसभा में जो हुआ उसकी समीक्षा की जरूरत, पाक सुप्रीम कोर्ट जारी करेगी आदेश

By रेनू तिवारी | Apr 04, 2022

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार दोपहर को 'संवैधानिक' आधार पर प्रधान मंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने के नेशनल असेंबली के अध्यक्ष असद कैसर के फैसले पर सुनवाई फिर से शुरू की।

 

सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की फुल कोर्ट की याचिका खारिज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के वकील फारूक नाइक के फुल कोर्ट बेंच के अनुरोध का जवाब देते हुए चीफ जस्टिस ने कहा, "अगर आप बेंच पर आपत्ति करते हैं, तो हम उठकर चले जाएंगे। एक पूर्ण न्यायालय एक ऐसा न्यायालय होता है जिसमें न्यायाधीशों की सामान्य संख्या से अधिक संख्या होती है। बिलावल भुट्टो जरदारी ने कोर्ट में कहा कि पाकिस्तान से ज्यादा अहम नहीं है इमरान का अहंकार।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विधानसभा में जो हुआ उसकी समीक्षा की जरूरत, मुख्य न्यायाधीश ने पीटीआई के वकील से कहा हमारे सामने राजनीतिक रूप से बात न करें

 

रविवार को अदालत ने राष्ट्रपति आरिफ अल्वी द्वारा नेशनल असेंबली को भंग करने का स्वत: संज्ञान लिया था। पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश उमर अता बंदियाल ने टिप्पणी की कि न्यायपालिका और विधायिका के बीच शक्तियों के पृथक्करण पर बहस के बाद न्यायपालिका नेशनल असेंबली की कार्यवाही में कुछ हद तक हस्तक्षेप कर सकती है। कोर्ट ने अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने पर स्पीकर के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर कासिम सूरी ने प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को संविधान के अनुच्छेद 5 का विरोधाभास बताते हुए खारिज कर दिया था।

 

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नेशनल असेंबली भंग करने के खिलाफ कोर्ट पहुंची  

पाकिस्तान का उच्चतम न्यायालय प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ नेशनल असेंबली में लाया गया अविश्वास प्रस्ताव खारिज किए जाने और खान की सिफारिश पर सदन भंग करने को राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी दिए जाने के मामले पर सुनवाई कर रहा है। इससे एक दिन पहले शीर्ष न्यायालय ने देश में मौजूदा राजनीतिक हालात पर स्वत: संज्ञान लिया था।

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इमरान खान की राजनीतिक चाल

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने देश के प्रधानमंत्री इमरान खान की सिफारिश पर नेशनल असेंबली (एनए) को भंग कर दिया है। इससे कुछ ही देर पहले नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष कासिम सूरी ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। खान ने संसद के निचले सदन, 342 सदस्यीय नेशनल असेंबली में प्रभावी तौर पर बहुमत खो दिया था। देश के प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल ने पाकिस्तान की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा था कि नेशनल असेंबली को भंग करने के संबंध में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति द्वारा शुरू किए गए सभी आदेश और कदम अदालत के आदेश पर निर्भर होंगे।

 

 पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला

न्यायाधीश बंदियाल ने साथ ही इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई एक दिन के लिए स्थगित कर दी थी। उच्चतम न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ ने सप्ताहांत के बावजूद प्रारंभिक सुनवाई की तथा राष्ट्रपति अल्वी और नेशनल असेंबली के उपाध्यक्ष सूरी सहित सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए। शीर्ष अदालत ने सभी पक्षों को कोई भी असंवैधानिक कदम उठाने से बचने का आदेश दिया और मामले की सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी थी। इससे पहले, विपक्ष ने शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था और सदन में विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ ने नेशनल असेंबली को भंग किए जाने को चुनौती देने की अपनी पार्टी के फैसले की घोषणा की थी। उन्होंने कहा, ‘‘हम उपाध्यक्ष के फैसले और प्रधानमंत्री की सलाह को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देने जा रहे हैं।’’

 

सुप्रीम कोर्ट बार के अध्यक्ष अहसान भून ने कहा कि प्रधानमंत्री और उपाध्यक्ष की कार्रवाई संविधान के खिलाफ है और ‘‘संविधान के अनुच्छेद 6 के तहत उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।’’ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने भी एक याचिका दायर कर अदालत से नेशनल असेंबली भंग करने के साथ-साथ उपाध्यक्ष के फैसले को असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध किया है। सूरी द्वारा अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिए जाने के बाद यह संकट उत्पन्न हुआ।

 

इससे प्रधानमंत्री खान को संसद को भंग करने के लिए देश के राष्ट्रपति को एक सिफारिश करने का मौका मिल गया, जो वह अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान का कोई परिणाम आने तक नहीं कर सकते थे। संयुक्त विपक्ष आठ मार्च को अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया था। देश की राजनीतिक स्थिति तब तक विपक्ष के पक्ष में थी जब तक कि खान यूक्रेन पर एक स्वतंत्र विदेश नीति का अनुपालन करने को लेकर अमेरिका द्वारा उन्हें सत्ता से बेदखल करने की साजिश की बात लेकर नहीं आए थे।


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