बजट में कहीं भी ऐसी झलक नहीं है जिसका असर पांच राज्यों के चुनावों पर हो

By डॉ. वेदप्रताप वैदिक | Feb 02, 2022

इस साल का जो बजट पेश किया गया है, उसे भाजपा के नेता अगले 25 साल और 100 साल तक के भारत को मजबूत बनानेवाला बजट बता रहे हैं और विपक्षी नेता इसे बिल्कुल बेकार और निराशाजनक घोषित कर रहे हैं। वैसे जब इस बजट को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण संसद में पेश कर रही थीं तो उनके भाषण को सुनने वाले लोगों को, खासतौर से सामान्य लोगों को लग रहा था कि इस बजट में उनके लिए कुछ नहीं है। सरकार ने न तो रोजमर्रा के इस्तेमाल की कुछ न कुछ चीज़ों को सस्ता करने की घोषणा की है, न आयकर को घटाकर मध्यम वर्ग को कोई राहत दी है और न ही आम लोगों को कुछ मुफ्त सुविधाओं की घोषणा की है। जैसा कि पिछले बजटों के समय जबर्दस्त नौटंकियां होती थीं, वैसी इस बार बिल्कुल भी दिखाई नहीं पड़ीं।

हर व्यक्ति यह सोच रहा था कि इन पांचों राज्यों के चुनाव में जीत हासिल करने के लिए सरकार इस बजट का इस्तेमाल जरुर करेगी। सच पूछा जाए तो किसानों और मध्यम वर्ग के व्यापारियों और नौकरीपेशा लोग तो इस बजट से निराश ही हुए हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियां जरुर खुश हुई होंगी कि उनके टैक्स में कटौती हुई है लेकिन सरकार ने जो सपने इस बजट में दिखाए हैं, यदि वह इन्हें ठोस रुप दे सकी तो लोक कल्याण काफी हद तक बढ़ेगा। जैसे वह 60 लाख नए रोजगार देगी, 400 नई रेलें चलाएगी, सारे गंगातटीय प्रदेशों में जैविक खेती को बढ़ावा देगी, 80 लाख मकान गरीबों को देगी, 200 नए टीवी चैनलों द्वारा मातृभाषा के जरिए शिक्षा का प्रसार करेगी, लगभग 4 करोड़ घरों में नलों द्वारा शुद्ध जल पहुंचाएगी, पांच नदियों को जोड़ेगी, 25000 किमी की नई सड़कें बनाएगी, लघु-उद्योगों के प्रोत्साहन में सवा दो लाख करोड़ रु. लगाएगी। इस तरह की घोषणाएं सुनने में तो अच्छी लगती हैं लेकिन इन पर भरोसा तभी होगा जबकि लोगों को इनके ठोस फायदे मिलने लगेंगे।

इसे भी पढ़ें: आम आदमी को राहत नहीं तो कोई अतिरिक्त भार भी नहीं

कोरोना महामारी ने करोड़ों लोगों को बेरोजगार किया है और करोड़ों की आमदनी आधी रह गई है, मंहगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है, बहुत-से लोग इलाज के अभाव में मारे गए हैं। ऐसी हालत में अगर इस बजट में आम लोगों को तात्कालिक राहत के कुछ संदेश मिलते तो उसका श्रेय सरकार को भी जरुर मिलता। भारत के लिए 25 और 100 साल के विकास की बात कही गई है लेकिन इस बजट में यदि देश की शिक्षा और चिकित्सा यानी मन और तन के सुधार के लिए कोई बुनियादी क्रांतिकारी की पहल इससे होती तो यह बजट सचमुच अन्य बजटों से बेहतर और ऐतिहासिक भी कहलाता।

- डॉ. वेदप्रताप वैदिक

प्रमुख खबरें

आम आदमी को लगेगा बड़ा झटका! Petrol-Diesel Price में ₹28 तक की बढ़ोतरी के बने आसार

Liverpool फैंस को मिली बड़ी राहत, Mohamed Salah की Injury पर आया अपडेट, जल्द लौटेंगे मैदान पर

Thomas Cup में भारत का धमाल, Chinese Taipei को 3-0 से रौंदकर Semi-Final में बनाई जगह।

India-Bangladesh रिश्तों में तल्खी! असम CM के बयान पर Dhaka ने जताई कड़ी आपत्ति, भेजा समन।