By अनन्या मिश्रा | Jan 08, 2026
ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय और कर्म का देवता माना जाता है। माना जाता है कि शनिदेव व्यक्ति के अच्छे-बुरे कर्मों का हिसाब रखते हैं और फिर उसी हिसाब से फल प्रदान करते हैं। वहीं जिन लोगों की कुंडली में शनि अनुकूल रहते हैं, उनको जीवन में मान-सम्मान, तरक्की और स्थिरता मिल सकती है। लेकिन अगर शनिदेव रुष्ट हो जाएं, तो जीवन में कई तरह की समस्याएं आने लगती हैं। व्यापार में हानि, नौकरी में रुकावट, सेहत संबंधी समस्याएं और मानसिक तनाव भी बढ़ता है।
हालांकि कुछ लोगों का सोचना है कि शनि देव जीवन में हमेशा कष्ट देते हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि शनि सिर्फ न्याय के देवता हैं। वह गलतियों और बुरे कर्मों पर दंड देते हैं और अच्छे कर्म करने पर आशीर्वाद देते हैं। शनि की कृपा पाने के लिए व्यक्ति को अपने व्यवहार और आचरण में सुधार करना चाहिए। वहीं आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ऐसी गलतियों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको करने से बचना चाहिए। इससे आप शनिदेव की नाराजगी से बच सकते हैं।
शनिदेव विनम्रता और सेवा भाव को अधिक महत्व देते हैं। शनिदेव को गरीबों, कमजोर और पीड़ित लोगों के रक्षक माने जाते हैं। माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति घमंड में आकर दूसरों का अपमान करता है, बुजुर्गों या गरीबों को सताता है, तो शनिदेव इससे रुष्ट होते हैं।
दूसरों को दुख देने से शनि की दृष्टि अधिक कठोर हो जाती है। ऐसा करने से नौकरी या व्यापार में बाधाएं आ सकती हैं। वहीं पारिवारिक जीवन में अशांति और रिश्तों में दूरियां बढ़ सकती हैं। इसलिए सलाह दी जाती है, आपको हमेशा सभी के साथ विनम्रता और सम्मान के साथ पेश आना चाहिए।
शनिदेव को न्याय और कर्म का देवता माना जाता है। इसलिए वह ईमानदारी और समय पर कर्तव्यों को निभाने की अपेक्षा करते हैं। माना जाता है कि अगर कोई जातक उधार लेता है और फिर उस धन को वापस नहीं करता है या जानबूझकर कर्ज की अनदेखी करता है, तो शनिदेव इससे नाराज हो सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो व्यक्ति के जीवन में आर्थिक संकट गहराता है।
ज्योतिष की मानें, तो शनिदेव का रंग काला और नीला माना जाता है। इन रंगों का अधिक महत्व होता है। लेकिन इनको अक्सर पहनना ज्यादा अच्छा नहीं माना जाता है। अगर आप नियमित रूप से यह रंग पहनते हैं, तो शनिदेव की नाराजगी की वजह बन सकती है। माना जाता है कि इन रंगों को पहनने से शनि देव की निगेटिव ऊर्जा बढ़ सकती है और यह मन-मस्तिष्क पर बोझ और तनाव भी ज्यादा महसूस हो सकता है।