By अनन्या मिश्रा | Jul 08, 2025
विवाह को जीवन का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है और कुंडली का सप्तम भाव विवाह का भाव होता है। कुंडली के सप्तम भाव को वैवाहिक जीवन और जीवनसाथी से संबंधित माना जाता है। वहीं कुंडली का पाँचवां भाव आपसी प्रेम संबंध को दर्शाता है। कुंडली के सप्तम भाव के स्वामी शुक्र ग्रह होते हैं और राशि तुला है। अगर इस भाव में शुभ ग्रह विराजमान हैं, तो विवाह में समस्या नहीं होती है। साथ पति-पत्नी के बीच संबंध मजबूत होते हैं। वहीं कुंडली के सप्तम भाव में यदि अशुभ ग्रह बैठ जाएं, तो विवाह में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है और बात डिवोर्स तक पहुंच सकती है।
यदि सप्तमेश 6वें, 8वें या 12वें घर में स्थित हों या फिर सप्तमेश पंचम भाव में हों। तो पति-पत्नी के बीच कलह शुरू होने लगती है। कुंडली के सप्तम भाव में शनि, राहु-केतु और मंगल जैसे क्रूर ग्रह हों या सूर्य की पूर्ण दृष्टि हो। या फिर सप्तमेश भाव में इन ग्रहों में से किसी की युति बन रही है, तो पति-पत्नी के बीच कलह और अनबन शुरू हो जाती है।
ज्योतिष नियमों के मुताबिक कुंडली में शुक्र एक से अधिक विवाह के कारक माने जाते हैं। यदि कुंडली में सप्तम और अष्टम के स्वामी कमजोर होकर केंद्र में आ जाएं या फिर लड़की की कुंडली में सप्तम और सप्तमेश का संबंध राहु, सूर्य और मंगल से हो जाएं, ऐसी स्थिति में लड़की को पति से अलगाव का सामना करना पड़ सकता है। कुंडली के सप्तम भाव के स्वामी अष्टम भाव में बैठ जाएं और अष्टम भाव के स्वामी सप्तम भाव में बैठ जाएं, तो महिला के पति की मृत्यु विवाह के कुछ महीनों में होने की आशंका मानी जाती है।