गनी की सत्ता को समाप्त करने के लिए इन तालिबानी नेताओं ने बनाई स्क्रिप्ट, अब पूरे अफगान पर है इनका कब्जा

By अंकित सिंह | Aug 16, 2021

अफगानिस्तान पर संकट बढ़ता जा रहा है। तालिबान ने अफगानिस्तान पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। आलम यह है कि वहां के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे है। हर तरफ दहशत का माहौल है। लोगों में खौफ है। राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़ चुके हैं। अमेरिका के सैन्य वापसी के 124 दिन बाद पूरे अफगानिस्तान पर तालिबान ने अपना कब्जा जमा लिया। इन सब के बीच आज हम आपको बताते है कि आखिर तालिबान के किन नेताओं ने काबुल फतेह की पूरी स्क्रिप्ट तैयार की है।

 

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हिबतुल्लाह अंखुदजादा- हिबतुल्लाह अंखुदजादा वर्तमान समय में देखें तो तालिबान की कमान हिबतुल्लाह अंखुदजादा के ही पास है। हिबतुल्लाह अंखुदजादा की पहचान तालिबान के वफादार नेताओं में से एक है। राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य मामलों पर लगभग सारे फैसले हिबतुल्लाह अंखुदजादा ही करता है। 2016 से लगातार वह तालिबान का सरगना बना हुआ है। अंखुदजादा पहले पाकिस्तान के एक मस्जिद में पढ़ाया करता था।


सिराजुद्दीन हक्कानी- सिराजुद्दीन हक्कानी कमांडर जलालुद्दीन हक्कानी का बेटा है। अपने पिता के बनाए हक्कानी नेटवर्क का नेतृत्व सिराजुद्दीन हक्कानी ही करता है। हक्कानी समूह तालिबान के लिए वित्तीय और सैन्य संपत्ति की देखरेख करता है।


मुल्ला मोहम्मद याकूब- तालिबान ग्रुप का सबसे सक्रिय सदस्य है मुल्ला मोहम्मद याकूब। यह तालिबान की स्थापना करने वाले मुल्ला उमर का बेटा हैं। याकूब तालिबान के सैन्य अभियानों का चीफ है।  सैन्य से जुड़ी तमाम रणनीति को भी बनाता है। उसी के इशारे पर तालिबान के आतंकी हमले करते हैं।

 

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मुल्ला अब्दुल गनी बरादर- मुल्ला अब्दुल गनी बरादर तालिबान के शीर्ष नेताओं में से एक है। यह तालिबान का सह-संस्थापक रह चुका है। वर्तमान में देखे तो वह तालिबान के शांति वार्ता दल का नेता है जो राजनीतिक समझौते को लेकर अपना दिखावा करना है। बरादर पाकिस्तान में जेल में भी रह चुका है। उसे पाक सरकार ने 2018 में रिहा किया था।


अब्बास स्टानिकजई- तालिबान के सरकार में यह उप मंत्री पद पर रह चुका है। हालांकि इसकी पहचान कट्टर धार्मिक नेताओं की है। वह पिछले एक दशक से दोहा में रहता है। वहीं पर तालिबान के राजनीतिक कार्यालय का संचालन करता है।


अब्दुल हकीम हक्कानी- अब्दुल हकीम हक्कानी लगातार तालिबान के साथ बना हुआ है। वह तालिबान के शांति वार्ता टीम का सदस्य है। तालिबान के शासन के दौरान वह मुख्य न्यायाधीश रह चुका है। वह धार्मिक विद्वानों के शक्तिशाली परिषद का भी प्रमुख है।

 

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