जो चाहे वो करेंगे...रूस के लिए EU से जो भारत ने बोला, सुनकर NATO के भी उड़े होश

By अभिनय आकाश | Jul 23, 2025

रूस को लेकर पश्चिमी देशों में इस समय जबरदस्त उबाल मचा है। ये गुस्सा इतना है कि इसमें किसी भी हद तक जाकर रूस को प्रभावित करने की स्थिति आ गई है। फिर चाहे रूस के सहयोगियों को भी मुश्किल में डालना हो तो वे तैयार नजर आ रहे हैं। अमेरिका में भारत और चीन के खिलाफ 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की योजना बिल के जरिए बन रही है। यूरोपीय संघ में इस बात को लेकर पूरजोड़ चर्चा है। भारत की एक कंपनी पर ईयू ने तो बैन भी लगा दिया। इसके साथ साथ हमने ये देखा कि कैसे नाटो के चीफ 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी भारत को दे रहे हैं। वहीं कल अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम की तरफ से भी एक चेतावनी आई। इसमें उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सैन्य अभियान का समर्थन करने वाले तेल से संबंधित आयातों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा कि मैं चीन, भारत और ब्राजील से यही कहूंगा: यदि आप इस युद्ध को जारी रखने के लिए सस्ता रूसी तेल खरीदते रहेंगे, तो हम आपको तहस-नहस कर देंगे और आपकी अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देंगे। 

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मिसरी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब यूरोपीय संघ ने कुछ दिन पहले रूसी ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाते हुए नए दंडात्मक उपायों की घोषणा की थी जिसमें गुजरात में वाडिनार रिफाइनरी पर प्रतिबंध भी शामिल था। मिसरी ने प्रेस वार्ता में रूस के खिलाफ यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा घोषित नए प्रतिबंधों के पीछे सुरक्षा संबंधी चिंताओं का उल्लेख किया, लेकिन कहा कि शेष विश्व भी इसी तरह के मुद्दों से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा संबंधी मुद्दों पर दोहरे मानदंड नहीं अपनाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि हम इस बात पर बहुत स्पष्ट हैं कि जहां तक ऊर्जा सुरक्षा का प्रश्न है, भारत के लोगों को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करना भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस संबंध में हमें जो भी करना होगा, हम करेंगे। मिसरी से पूछा गया था कि क्या रूसी ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाते हुएपश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए ताजा प्रतिबंधों के मद्देनजर ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित मुद्दे प्रधानमंत्री मोदी और उनके ब्रिटिश समकक्ष केअर स्टार्मर के बीच वार्ता में उठेंगे।

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यूक्रेन पर आक्रमण के कारण मॉस्को के विरुद्ध पश्चिमी देशों के बढ़ते प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने पिछले कुछ वर्षों में रूस से अपनी ऊर्जा खरीद में उल्लेखनीय वृद्धि की है। वर्तमान में कुल आपूर्ति में लगभग 35 प्रतिशत हिस्सेदारी रूसी कच्चे तेल की है, जिसके बाद इराक और सऊदी अरब का स्थान है। मिसरी ने कहा कि जैसा कि हमने पहले कहा है, यह महत्वपूर्ण है कि ऊर्जा संबंधी मुद्दों पर दोहरे मापदंड नहीं अपनाये जाएं तथा वैश्विक ऊर्जा बाज़ार की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट दृष्टिकोण से देखा जाए कि ऊर्जा उत्पादों के आपूर्तिकर्ता कहां स्थित हैं, वे कहां से आने वाले हैं और किसे, किस समय, ऊर्जा की आवश्यकता है।

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