अचानक हाइवे पर उतरा पीएम मोदी का ये भयंकर विमान, रच गया इतिहास!

By अभिनय आकाश | Feb 14, 2026

14 फरवरी असम का डिब्रूगढ़ और भारत की सुरक्षा रणनीति में एक नया ऐतिहासिक दिन। भारतीय वायुसेना ने इतिहास रच दिया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद सी130 जे सुपर हरकुलस से हाईवे पर बने इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी पर उतरे। आज देश की पहली हाईवे इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उतरे। यह कोई सामान्य रनवे नहीं है। यह एक ऐसा हाईवे है जो जरूरत पड़ने पर एयरफोर्स का रनवे बन जाता है। प्रधानमंत्री ने लैंडिंग की लॉकिड मार्टिन C130 जे सुपर हरकुलस से जो स्पेशल ऑपरेशन और टेक्निकल मिशनों के लिए जाना जाता है। चलिए अब जानते हैं ईएलएफ यानी कि इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी है क्या? सोचिए जिस हाईवे पर रोज गाड़ियां दौड़ती है, वहां कुछ मिनटों में एयरफोर्स का रनवे बन जाए।

ईएलएफ एक ऐसा हाईवे स्ट्रिप होता है जिसे इस तरह डिजाइन किया जाता है। जरूरत पड़ने पर लड़ाकू विमान उतर सकें।  ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट ऑपरेट कर सकें। हेलीकॉप्टर से कैजुअल्टी इवैक्यूएशन हो सके। अगर युद्ध में मुख्य एयरबेस को नुकसान हो जाए तो यही हाईवे बन जाएगा बैकअप एयरबेस। 

डिब्रूगढ़ ईएलएफ क्यों खास है?

डिब्रूगढ़ ऊपरी असम में है। भारत चीन सीमा के बेहद करीब है। रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। अब यह ईएलएफ पूर्वी सेक्टर में भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल गहराई बढ़ाता है। यह सुविधा दुश्मन के लिए टारगेटिंग मुश्किल बनाती है। एयरक्राफ्ट की सर्वाइवल कैपेबिलिटी बढ़ाती है। तेज तैनाती और रिस्पांस सुनिश्चित करती है। यह सिर्फ उद्घाटन नहीं था। यह पावर शो था वायुसेना का। प्रधानमंत्री मोदी का खुद इस ट्रिप पर उतरना एक बड़ा प्रतीक है। यह वही मॉडल है जैसा साल 2021 में उत्तर प्रदेश में हुआ था जब उन्होंने सुल्तानपुर के हाईवे स्ट्रिप पर लैंडिंग की थी। लेकिन डिब्रूगढ़ का महत्व कहीं ज्यादा है क्योंकि यह पूर्वोत्तर के संवेदनशील मोर्चे पर है। 

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 यह ईएलएफ कोई अकेला प्रोजेक्ट नहीं है। सड़क परिवहन मंत्रालय और इंडियन एयरफोर्स देश भर में 28 ऐसे स्थान चिन्हित कर चुके हैं। असम में ही पांच ईएलएफ बन रहे हैं। इतना ही नहीं कुछ और बड़े प्रोजेक्ट हैं जैसे ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे प्रस्तावित रोड, रेल, सुरंग, ऑल वेदर, टनल, रणनीतिक सड़क नेटवर्क और इन सब का मकसद है सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर निर्भरता कम करना, तेज सन तैनाती करना और सीमाई सुरक्षा सुनिश्चित करना। अब सिलीगुरु कॉरिडोर जिसे चिकन ने कहा जाता है। भारत के लिए बेहद संवेदनशील इलाका है। अगर वहां कनेक्टिविटी प्रभावित हो जाए तो पूर्वोत्तर का संपर्क कट सकता है।

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