By अभिनय आकाश | Jun 09, 2026
ईरान का सीधा इजरायल पर मिसाइलों का रेला चल पड़ा है। कहा जा रहा है कि यह इजरायल की उन गुस्ताखियों की सजा है जो वह मना करने के बावजूद लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ कर रहा था। लेकिन 7 और 8 जून की दरमियानी रात ईरान ने जिस तरह से इजरायल पर पहले और सीधे हमला किया है वो कई इशारे दे रहा है। ईरान के इस अंदाज और आक्रामकता ने दिखा दिया है कि सुप्रीम लीडर मोजतबा खामनेई ने पूरी तरह टेकओवर ले लिया है और इस वक्त एक बार फिर आईआरजीसी में बेहद ताकतवर हो गई है। अब तक ज्यादातर देखा गया था कि ईरान ने खुद पर हुए अमेरिका और इजरायल के हमलों पर पलटवार ही किया है। लेकिन इस बार ईरान ने पहला हमला किया सीधा इजरायल पर। इससे यह भी साफ हो गया है कि ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन की रिजीम अपने रेजिस्टेंस को जिन्हें वह प्रतिरोध की दूरी बताते हैं कोलैप्स नहीं होने देगी।
ईरान अपने अलायंस यानी प्रतिरोध की धुरी के साथ खुलकर खड़ा हो गया है और इजरायल को यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि अगर तुम करोगे तो हम भी करेंगे। यही वजह भी रही कि इधर हिजबुल्ला के लिए ईरान ने इसराइल पर हमला कर दिया। उधर ईरान के समर्थन में उसके दूसरे प्रॉक्सी हूती ने लाल सागर पर पहरा बैठा दिया और इस समुंदरी रास्ते को ब्लॉक करने का ऐलान कर दिया। यह इस बात की अलामत है कि ईरान में मौजूदा नेतृत्व पूरी रणनीति के साथ लंबी और आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है। अब इसराइल की आक्रामकता को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकेगा। जिसका डर था वही हो रहा है। मिडिल ईस्ट में अब इसराइल की मनमानी की कीमत सऊदी, यूएई, क़तर सबको चुकानी पड़ेगी और पूरी दुनिया को भी।